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नागौरी अश्वगंधा बनी ब्रांड, जीआइ टैग के बाद अब मिला सरकारी अनुदान

नागौरी अश्वगंधा की खेती पर किसान को मिलेगा 50% अनुदान, राष्ट्रीय बागवानी मिशन में शामिल कर मांगे आवेदन
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नागौर

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Shyam Lal Choudhary

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Updated: 27 Jun 2026, 12:06 PM IST

नागौरी अश्वगंधा

नागौरी अश्वगंधा

नागौर. इसी साल जीआइ (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग प्राप्त करने वाली नागौरी अश्वगंधा अब किसानों की आय बढ़ाने का नया माध्यम बनने जा रही है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) के तहत अश्वगंधा को औषधीय फसलों की श्रेणी में शामिल कर किसानों को लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देने का निर्णय लिया है। इससे नागौर जिले में औषधीय खेती को प्रोत्साहन मिलेगा और किसानों को बड़ा फायदा होगा।

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को उद्यानिकी विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन ‘मेडिसिनल प्लांट’ श्रेणी के अंतर्गत किया जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों को लागत का आधा हिस्सा अनुदान के रूप में दिया जाएगा।

कम लागत की फसल

विशेषज्ञों के अनुसार नागौर की जलवायु और मिट्टी अश्वगंधा की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। कम पानी और अपेक्षाकृत कम लागत में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को पारंपरिक खेती के मुकाबले ज्यादा लाभ देती है। जीआइ टैग मिलने के बाद नागौरी अश्वगंधा की ब्रांड वैल्यू भी बढ़ी है। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।

बदलेगा फसल चक्र

उद्यानिकी विभाग के अनुसार अश्वगंधा की खेती पर अनुदान मिलने से किसान अब परम्परागत बाजरा, मूंग और ग्वार जैसी फसलों के साथ औषधीय खेती को भी अपनाएंगे। इससे खेती का विविधीकरण होगा और फसल चक्र भी बदलेगा। किसानों की आय में स्थिरता भी आएगी।

क्या है नागौरी अश्वगंधा का जीआइ टैग?

नागौर क्षेत्र में उत्पादित अश्वगंधा को उसकी विशिष्ट गुणवत्ता के आधार पर जीआइ टैग प्राप्त हुआ है। इससे उत्पाद की भौगोलिक पहचान और प्रामाणिकता सुनिश्चित हुई है। जीआइ टैग मिलने के बाद उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलती है। भविष्य में किसानों को बेहतर मूल्य और ब्रांडिंग का लाभ मिलने लगेगा।

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

राज्य सरकार ने इस बार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत नागौरी अश्वगंधा को औषधीय फसलों की श्रेणी में शामिल कर लिया है। इससे किसानों को लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। यहां की जलवायु अश्वगंधा उत्पादन के लिए अनुकूल है। जनवरी में जीआइ टैग मिला और इसके फायदे सामने आने लगे है।

- मोहन दादरवाल, उप निदेशक, उद्यानिकी विभाग नागौर