25 जून 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वेस्ट से बेस्ट: मकराना का ‘पांडू’ अब बन गया सफेद सोना

मकराना मार्बल से निकलने वाला वेस्ट अब निस्तारित होने लगा है। सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण संरक्षण व किसानों को आय के रूप में हुआ है। कभी मार्बल फै​क्टि्रयां खेतों में जबरन फेंक देती थी। अब टाइल्स, टूथपेस्ट, दवा और पशु-पक्षी आहार उद्योग में मांग होने से इसके पैसे मिलने लगे है।
3 min read
Google source verification
मकराना क्षेत्र में लगे मार्बल वेस्ट के लगे ढेर।

मकराना क्षेत्र में लगे मार्बल वेस्ट के लगे ढेर।

दिनेश स्वामी @ नागौर. मकराना ने दुनिया को संगमरमर दिया, अब उसका ‘कचरा’ भी करोड़ों का कारोबार बन रहा है। अब यहां पत्थर से ज्यादा चर्चा पत्थर के वेस्ट यानि कचरे की हो रही है। सफेद संगमरमर की कटाई और घिसाई के दौरान निकलने वाला महीन सफेद पाउडर आज किसानों और कारोबारियों के लिए कमाई का नया जरिया बन गया है। स्थानीय भाषा में इसे ‘पांडू’ कहा जाता है, जो जिसके पास पड़ा है वह उसके लिए पैसा उगल रहा है।

अब रॉयल्टी वसूली शुरू

वेस्ट की मांग होने लगी तो सरकार ने भी इस पर अब रॉयल्टी वसूली शुरू कर दी है। इससे सरकारी खजाने में भी पैसा आ रहा है।सात-आठ साल पहले तक मार्बल उद्योग से निकलने वाले इस वेस्ट के निस्तारण की बड़ी समस्या थी। खदान और फैक्ट्री मालिक इसे खाली जमीनों व खेतों में डाल देते थे। इससे खेतों की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती थी, धूल उड़ने से प्रदूषण फैलता था। ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती थी। अब यही पांडू ‘सफेद सोना’ बन चुका है।

टाइल्स फैक्ट्रियों में बढ़ी मांग

कारोबारियों के अनुसार मकराना से बड़ी मात्रा में यह पाउडर गुजरात के मोरवी स्थित टाइल्स उद्योगों में भेजा जाने लगा है। टाइल्स निर्माण में कैल्शियम युक्त इस पाउडर का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है। मांग बढ़ने के बाद खेतों में वर्षों से जमा पड़े पांडू को भी खरीदा जा रहा है। किसान हरिराम जाट बताते हैं कि यह वेस्ट पहले उनके लिए सिरदर्द था। अब जिसके खेत में पड़ा है, उसे आमदनी दे रहा है।

पर्यावरण को भी राहत, सर्कुलर इकोनॉमी भी

मार्बल उद्योग से निकलने वाले वेस्ट के कारण पहले धूल प्रदूषण और जमीन खराब होने की शिकायतें आम थी। अब इस सामग्री के पुन: उपयोग से न केवल निस्तारण की समस्या कम हुई है, बल्कि पर्यावरणीय दबाव भी घटा है। एक उद्योग का कचरा दूसरे उद्योग का कच्चा माल बन रहा है। जो सर्कुलर इकोनॉमी का अच्छा उदाहरण भी बना है।

जानिए...किन उद्योगों में होता है उपयोग

  • कैल्शियम आधारित उद्योगों में
  • सिरेमिक व टाइल्स इंडस्ट्री
  • वॉल पुट्टी और निर्माण सामग्री
  • पोल्ट्री फीड में मुर्गी दाना
  • टूथपेस्ट निर्माण
  • फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग)
  • पेंट उद्योग, प्लास्टिक और रबर उद्योग

क्या है ‘पांडू’?

मार्बल की कटाई, पॉलिश और प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले सफेद महीन पाउडर को स्थानीय भाषा में पांडू कहते है। इसमें कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा अधिक है, जिससे औद्योगिक उपयोगिता बढ़ गई है। शुद्धता से मकराना का पांडू सर्वाधिक उपयुक्त है।

कभी समस्या, अब बेसकीमती

पहले अब

बेकार व प्रदूषणकारी वेस्ट औद्योगिक कच्चा माल

खेतों में जबरन डालते अब डंपिंग की समस्या नहीं

प्रदूषण और धूल की समस्या उद्योगों में उपयोगी

मार्बल उद्योग पर बोझ अतिरिक्त आय का स्रोत

निस्तारण की परेशानी रीसाइक्लिंग से समाधान

पर्यावरण को मिली राहत

मार्बल व पांडू व्यवसायी दीपक शर्मा ने बताया कि मार्बल उद्योग से निकलने वाले वेस्ट के निस्तारण की समस्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई थी। अब इसके व्यावसायिक उपयोग से न केवल उद्योग को राहत मिली है, बल्कि धूल प्रदूषण और अवैज्ञानिक डंपिंग में भी कमी आई है। करीब डेढ़ साल पहले सरकार ने पांडू पर रॉयल्टी लगा दी। इससे वेस्ट के उठाव में कमी आई है। सरकार को वेस्ट को रॉयल्टी मुक्त करना चाहिए।

25 से 35 फीसदी वेस्ट

मकराना क्षेत्र में सैकड़ों मार्बल इकाइयां संचालित हैं। मार्बल ब्लॉक की कटाई और प्रोसेसिंग के दौरान लगभग 25 से 35 प्रतिशत तक सामग्री वेस्ट के रूप में निकलती है। इसमें अधिकांश हिस्सा कैल्शियम कार्बोनेट होता है। मकराना मार्बल की शुद्धता 95 से 98 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट तक मानी जाती है। इसलिए पाउडर औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त है।

डाटा...

  • 50 गाड़ी रोजाना मकराना से मोरवी जा रहा पांडू।
  • 145 रुपए प्रति टन सरकार ने शुरू की रॉयल्टी वसूली।
  • 150 रुपए प्रतिटन के भाव में बिक रहा यह वेस्ट।
  • 5 गुणा कीमत वेस्ट की पिछले 5 साल में बढ़ी।
  • 50 हजार टन पांडू सरकारी गोचर भूमि पर डंप पड़ा।