
मकराना क्षेत्र में लगे मार्बल वेस्ट के लगे ढेर।
दिनेश स्वामी @ नागौर. मकराना ने दुनिया को संगमरमर दिया, अब उसका ‘कचरा’ भी करोड़ों का कारोबार बन रहा है। अब यहां पत्थर से ज्यादा चर्चा पत्थर के वेस्ट यानि कचरे की हो रही है। सफेद संगमरमर की कटाई और घिसाई के दौरान निकलने वाला महीन सफेद पाउडर आज किसानों और कारोबारियों के लिए कमाई का नया जरिया बन गया है। स्थानीय भाषा में इसे ‘पांडू’ कहा जाता है, जो जिसके पास पड़ा है वह उसके लिए पैसा उगल रहा है।
वेस्ट की मांग होने लगी तो सरकार ने भी इस पर अब रॉयल्टी वसूली शुरू कर दी है। इससे सरकारी खजाने में भी पैसा आ रहा है।सात-आठ साल पहले तक मार्बल उद्योग से निकलने वाले इस वेस्ट के निस्तारण की बड़ी समस्या थी। खदान और फैक्ट्री मालिक इसे खाली जमीनों व खेतों में डाल देते थे। इससे खेतों की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती थी, धूल उड़ने से प्रदूषण फैलता था। ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती थी। अब यही पांडू ‘सफेद सोना’ बन चुका है।
कारोबारियों के अनुसार मकराना से बड़ी मात्रा में यह पाउडर गुजरात के मोरवी स्थित टाइल्स उद्योगों में भेजा जाने लगा है। टाइल्स निर्माण में कैल्शियम युक्त इस पाउडर का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है। मांग बढ़ने के बाद खेतों में वर्षों से जमा पड़े पांडू को भी खरीदा जा रहा है। किसान हरिराम जाट बताते हैं कि यह वेस्ट पहले उनके लिए सिरदर्द था। अब जिसके खेत में पड़ा है, उसे आमदनी दे रहा है।
मार्बल उद्योग से निकलने वाले वेस्ट के कारण पहले धूल प्रदूषण और जमीन खराब होने की शिकायतें आम थी। अब इस सामग्री के पुन: उपयोग से न केवल निस्तारण की समस्या कम हुई है, बल्कि पर्यावरणीय दबाव भी घटा है। एक उद्योग का कचरा दूसरे उद्योग का कच्चा माल बन रहा है। जो सर्कुलर इकोनॉमी का अच्छा उदाहरण भी बना है।
मार्बल की कटाई, पॉलिश और प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले सफेद महीन पाउडर को स्थानीय भाषा में पांडू कहते है। इसमें कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा अधिक है, जिससे औद्योगिक उपयोगिता बढ़ गई है। शुद्धता से मकराना का पांडू सर्वाधिक उपयुक्त है।
पहले अब
बेकार व प्रदूषणकारी वेस्ट औद्योगिक कच्चा माल
खेतों में जबरन डालते अब डंपिंग की समस्या नहीं
प्रदूषण और धूल की समस्या उद्योगों में उपयोगी
मार्बल उद्योग पर बोझ अतिरिक्त आय का स्रोत
निस्तारण की परेशानी रीसाइक्लिंग से समाधान
मार्बल व पांडू व्यवसायी दीपक शर्मा ने बताया कि मार्बल उद्योग से निकलने वाले वेस्ट के निस्तारण की समस्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई थी। अब इसके व्यावसायिक उपयोग से न केवल उद्योग को राहत मिली है, बल्कि धूल प्रदूषण और अवैज्ञानिक डंपिंग में भी कमी आई है। करीब डेढ़ साल पहले सरकार ने पांडू पर रॉयल्टी लगा दी। इससे वेस्ट के उठाव में कमी आई है। सरकार को वेस्ट को रॉयल्टी मुक्त करना चाहिए।
मकराना क्षेत्र में सैकड़ों मार्बल इकाइयां संचालित हैं। मार्बल ब्लॉक की कटाई और प्रोसेसिंग के दौरान लगभग 25 से 35 प्रतिशत तक सामग्री वेस्ट के रूप में निकलती है। इसमें अधिकांश हिस्सा कैल्शियम कार्बोनेट होता है। मकराना मार्बल की शुद्धता 95 से 98 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट तक मानी जाती है। इसलिए पाउडर औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त है।
Published on:
25 Jun 2026 04:07 pm
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