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नागौर हाउसिंग बोर्ड की मनमानी, आवेदकों की सहमति के बिना 10 किमी दूर बना रहे मकान

ताऊसर रोड हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मकान देने का सपना दिखाकर भरवाए आवेदन, अब बालवा रोड पर बना रहे मकान, मकान बनाने का ठेका भी सिंगल बिडर को दिया, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
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नागौर

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Shyam Lal Choudhary

•

Updated: 23 Jun 2026, 4:50 PM IST

डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय योजना Nagaur

डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय योजना Nagaur

नागौर. राजस्थान आवासन मंडल नागौर ने लोगों को ताऊसर रोड आवासीय योजना नागौर में विशिष्ट पंजीकरण योजना-2024 के तहत मकान बनाकर देने का सपना दिखाकर अब दो साल बाद 10 किलोमीटर दूर बालवा रोड पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय योजना में मकान देने की तैयारी कर ली है। इसके लिए बोर्ड ने विज्ञप्ति जारी कर आवेदकों से 15 दिन में सहमति पत्र मांगे हैं, जो आवेदक सहमति नहीं देंगे, उन्हें आवेदन के समय जमा करवाई गई राशि रिफंड की जाएगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आवेदकों की बिना सहमति के नए मकान बनाने का काम क्यों शुरू किया गया और यदि आवेदकों ने मकान लेने से मना कर दिया तो फिर मकान किसे देंगे। क्योंकि इस कॉलोनी में पहले ही कई मकान खाली पड़े हैं।

विभागीय सूत्रों ने बताया कि आवासन मंडल की ओर से जब भी कोई योजना निकाली जाती है तो सबसे पहले आवेदन लिए जाते हैं, फिर मकान एलॉटमेंट किए जाकर आवंटियों के समक्ष मकानों का निर्माण करवाया जाता है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों और उच्च अधिकारियों ने हाउसिंग बोर्ड के नियमों को ताक में रखकर मकान बनाने का काम शुरू कर दिया, वो भी दस किलोमीटर दूर।

गंभीर बात यह भी है कि बालवा रोड डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय योजना की मूल डिजाइन एवं स्वरूप को भी बदला गया है। वर्तमान में जहां ईडब्ल्यूएस एवं एलआईजी श्रेणी के मकान बनाए जा रहे हैं, वहां अन्य श्रेणी के मकान बनाए जाने थे। स्थानीय आंवटियों का कहना है कि आवासन मंडल के अधिकारियों ने पहले मकानों के निर्माण में ठेकेदारों के साथ मिलकर जमकर भ्रष्टाचार किया गया, जो जांच में भी साबित हो गया। अब इस कॉलोनी के मूल स्वरूप को बिगाड़ रहे हैं। कुछ आवंटियों ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

निर्माण कार्य में बरती जा रही अनियमितता

गौरतलब है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय योजना के मकानों में ठेकेदारों ने जमकर भ्रष्टाचार किया, जिसका खमियाजा आवंटी आज भी भुगत रहे हैं। इसको लेकर कई अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ एसीबी में प्रकरण भी दर्ज हुए। इसके बावजूद नए बनाए जा रहे मकानों की गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। निर्माण कार्य में सीमेंट और बजरी का अनुपात बिगाड़ा जा रहा है। इसमें यह बात भी सामने आई है कि ठेका भी सिंगल बिडर को दिया गया।

जांच में दोषी साबित, फिर भी कार्रवाई नहीं होने से हौसले बुलंद

हाउसिंग बोर्ड के आवंटियों का कहना है कि मकानों के निर्माण कार्य में किए गए भ्रष्टाचार को लेकर एसीबी में चार एफआईआर दर्ज की गई, जिनकी जांच में भ्रष्टाचार साबित होने के बावजूद दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं और वे नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं।

कैविएट लगाने में की देरी, इसलिए मिला स्टे

ताऊसर रोड आवासीय योजना की 27 बीघा जमीन पर कुछ लोगों की ओर से कब्जा करने के बाद जब मंत्री स्तर से दबाव आया तो पुलिस एवं प्रशासन के साथ हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने गत वर्ष अतिक्रमण हटवाया था, लेकिन हाईकोर्ट में कैविएट लगाने में देरी की, जिसका फायदा उठाते हुए कब्जा करने वालों ने स्टे ले लिया। अब एक साल बीतने को आया है, लेकिन हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी स्टे वेकेंट नहीं करवा पाए हैं। गौरतलब है कि इस जमीन के विवाद को लेकर हाउसिंग बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में जीत चुका है, लेकिन प्रभावी पैरवी नहीं होने से हाईकोर्ट से वापस स्टे मिल गया। आवेदकों का कहना है कि अधिकारियों ने जानबुझ कर ढिलाई बरती।

आयुक्त के निर्देश पर शुरू करवाया काम

डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय योजना नागौर में नए मकानों का निर्माण कार्य आयुक्त के निर्देश पर शुरू करवाया था। अब उन्होंने ताऊसर रोड आवासीय योजना में विशिष्ट पंजीकरण योजना 2024 के तहत पंजीकरण कराने वाले आवेदकों से सहमति लेने के निर्देश दिए हैं। हम केवल उच्चाधिकारियों के निर्देशों की पालना कर रहे हैं।

- राज्यश्री, आवासीय अभियंता, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, खंड नागौर