
प्रसूता रूकमा और प्रसूता की मौत के बाद नवजात को उठाए महिला (पत्रिका फोटो)
JLN hospital Nagaur Delivery Death Case: डीडवाना/नागौर: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बीच सोमवार को नागौर और डीडवाना में दो प्रसूताओं की मौत से हड़कंप मच गया। नागौर के जेएलएन जिला चिकित्सालय में कांटिया गांव निवासी रुकमा (21) की सामान्य प्रसव के बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसे जोधपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। वहीं, डीडवाना के राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल में मोनिका (22) और उसके गर्भस्थ शिशु की प्रसव के दौरान मौत हो गई।
दोनों मामलों में परिजनों ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टॉफ और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। नागौर अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रुकमा को शाम को सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उपचार कर जोधपुर रेफर किया गया। रेजिडेंट डॉक्टर ने इसे हार्ट अटैक का मामला बताया। वहीं, डीडवाना अस्पताल ने मोनिका की मौत का कारण गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक हाई बीपी और दौरे आना बताया।
सूचना मिलने पर कोतवाली थानाधिकारी वेदपाल शिवरान पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे तथा परिजनों से समझाइश कर शव को जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में रखवाने के लिए कहा, लेकिन देर रात तक परिजन राजी नहीं हुए।
बता दें कि मामला बढ़ता देख डीएसपी जतिन जैन मौके पर पहुंचे। बाद में देर रात शव मोर्चरी में रखवाया। उधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि कांटिया निवासी रूकमा की सोमवार सुबह करीब 9 बजे नॉर्मल डिलीवरी हुई, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ थे। शाम को प्रसूता ने चेस्ट पेन की शिकायत की तो ड्रीप चढ़ाई और दर्द कम करने के लिए सामान्य इंजेक्शन लगाए, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर जोधपुर रेफर किया, एंबुलेंस में बैठाते समय उसकी मौत हो गई।
प्रसूता के साथ जो महिलाएं थी, उनका आरोप था कि इंजेक्शन लगाने के बाद रूकमा की तबीयत ज्यादा खराब हुई। दर्द की शिकायत की तो नर्सिंगकर्मियों ने एक के बाद एक तीन-चार इंजेक्शन लगाए, जिससे तबीयत और बिगड़ गई। काकी ससुर मुन्नाराम ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि रूकमा की प्रसव के बाद तबीयत ठीक थी, लेकिन दोपहर बाद तबीयत बिगड़ने लगी।
इसके बाद डॉक्टर और नर्सिंगकर्मी जोधपुर रेफर करने की बात कहने लगे। हमने पूछा क्या दिक्कत है तो बोले हमसे जितना हो सका, उतना कर दिया, अब जोधपुर ले जाओ।
रूकमा की ननद साबू ने आरोप लगाया कि नर्सिंग स्टॉफ ने उनसे चार-पांच हजार रुपए बधाई के भी लिए। रूकमा ने पीठ में दर्द की शिकायत की तो दो इंजेक्शन लगाए। फिर भी दर्द कम नहीं होने पर नर्सिंगकर्मी बोले, जोधपुर ले जाओ।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद प्रसूता ठीक थी, ब्लीडिंग भी नहीं थी। पेशाब भी किया, शाम को छाती में दर्द की शिकायत करने पर ड्यूटी डॉक्टर रजनीश ने देखी। प्रोटोकॉल के अनुरूप इलाज किया, लेकिन सुधार नहीं होने पर रेफर किया गया। रेफर के दौरान प्रसूता की मौत हो गई।
-डॉ. शैलेंद्र लोमरोड, लेबर रूम प्रभारी, एमसीएच विंग
नौ बजे नॉर्मल डिलीवरी हुई, दिनभर ठीक थी। शाम को अचानक चेस्ट पेन की शिकायत की तो मैंने चेक किया। बीपी थोड़ा कम आ रहा था, इसके बाद ड्रिप लगाई और साधारण इंजेक्शन लगाया, जो यहां उपलब्ध है। हालांकि, सीवर रिपोर्ट में पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन प्रथम दृष्टया हार्ट अटैक का मामला लग रहा है।
-डॉ. रजनीश, रेजिडेंट, एमसीएच विंग, जेल
Updated on:
23 Jun 2026 07:47 am
Published on:
23 Jun 2026 07:23 am
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