11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Nagaur : डांगावास कांड में सभी 40 आरोपी बरी, सचिन पायलट ने उठाया गंभीर सवाल, कहा- सच सामने नहीं आया

Nagaur : नागौर के डांगावास कांड में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने गंभीर सवाल उठाया कि इतनी बड़ी वारदात का सच आखिर सामने क्यों नहीं आ सका?
2 min read
Google source verification
Nagaur Dangawas case Sachin Pilot raised question say truth not come out

Nagaur Dangawas Case : कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट। फोटो-ANI

Nagaur : नागौर का चर्चित डांगावास कांड आज भी हर राजस्थानी के दिलोदिमाग में बसा हुआ है। 5 अगस्त को आए फैसले के बाद एक बार फिर यह कांड फिर से चर्चा में आ गया। वजह थी कि इस कांड के सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने गंभीर सवाल उठाया कि इतनी बड़ी वारदात का सच आखिर सामने क्यों नहीं आ सका?

सचिन पायलट ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि नागौर के डांगावास में वर्ष 2015 की वह दर्दनाक घटना आज भी पीड़ित परिवारों के जख्मों को ताजा करती है। जमीन विवाद में 6 लोगों की जान चली गई, जिनमें 5 दलित थे। करीब 11 वर्षों तक मामला जांच और अदालत की प्रक्रिया से गुजरता रहा।

सचिन पायलट ने लिखा कि अब विशेष SC-ST अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी वारदात का सच आखिर सामने क्यों नहीं आ सका? सत्ता में बैठी भाजपा सरकार की जिम्मेदारी है कि यह घटना भी आपकी पिछली सरकार के शासन में हुई थी और अब फ़ैसला भी आपके ही शासन में आया है, सरकार अब इस मामले को महज एक अदालती फैसले तक सीमित न रखे, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कानूनी कदम उठाए।

'डांगावास के पीड़ित परिवारों के साथ न्याय हो'

सचिन पायलट ने लिखा कि सरकार की यह भी देखना चाहिए कि इतने महत्वपूर्ण मामले में जांच एवं अभियोजन के स्तर पर कहां कमियां रह गईं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए की डांगावास के पीड़ित परिवारों के साथ न्याय हो।

यह था मामला

गत 14 मई 2015 को जमीन के मालिकाना हक को लेकर हुए खूनी संघर्ष में ट्रैक्टर से कुचलकर एक गुट के 5 जनों और एक अन्य युवक की मारपीट कर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड के बाद वर्ष 2015 में पुलिस ने मुख्य आरोपियों सहित कुछ लोगों को गिरफ्तार किया। इन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। बाद में राजस्थान सरकार ने इस प्रकरण को सीआइडी को सौंप दिया। पीड़ित परिवार की मांग पर जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को सौपी गई। करीब 2 साल तक मामले की तफ्तीश करने के दौरान सीबीआइ ने चार्जशीट पेश करने के साथ ही फरार अन्य आरोपियों की धरपकड़ की। 2019 में राजस्थान हाइकोर्ट ने मामले में कड़ा रुख अपनाया और फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए ट्रायल को 3 महीने रोकने और सीबीआइ को सख्त आदेश दिए। इसके बाद पुलिस टीमों ने दबिश देकर 40 आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भिजवाया था।

40 आरोपियों को बरी किया तो 5 जनों की हत्या किसने की?

इस मामले में मृतक के रिश्तेदार गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है, लेकिन कोर्ट को आधी-अधूरी जानकारी मिली है। हमारा सवाल रहेगा कि कोर्ट ने अगर 40 आरोपियों को बरी किया है तो फिर 5 जनों की हत्या किसने की, इसलिए अब हम हाईकोर्ट जाएंगे।