माडीबाई मिर्धा महिला कॉलेज परिसर की जमीन पर अतिक्रमण का मामला
नागौर. जिला मुख्यालय की माडीबाई मिर्धा राजकीय महिला कॉलेज की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर पिछले 12 दिन से चल रहे प्रकरण में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय कोचर ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि अप्रार्थीगण विधि अनुसार स्वयं में निहित अधिकारों एवं शक्तियों का प्रयोग कर विधि अनुसार कोई भी कार्रवाई कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। गौरतलब है कि महिला कॉलेज की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाने को लेकर गत 3 अक्टूबर से विवाद चल रहा है।
कॉलेज छात्रों एवं अन्य लोगों द्वारा खुद के स्तर पर अतिक्रमण हटाने पर समुदाय विशेष ने धार्मिक स्थल से तोडफ़ोड़ करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों की बैठक बुलाकर कॉलेज की जमीन पर बने कमरे व टीन शेड को हटाने की सहमति बनी थी। प्रशासन ने कॉलेज परिसर की जमीन के खाई खुदवाकर कमरे को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन समुदाय विशेष के लोगों ने टीन शेड नहीं हटाया और न्यायालय की शरण ले ली। प्रार्थी अली असगर पुत्र अब्दुल खलील अंसारी ने न्यायालय में वाद दायर कर धार्मिक स्थल की सम्पत्ति के साथ-साथ स्वयं का अधिकार होना बताया।
प्रार्थी ने अधिवक्ता पीर मोहम्मद खान के जरिए बताया कि अप्रार्थीगण जिला कलक्टर, नागौर तहसीलदार एवं उपखंड अधिकारी एवं उनके कर्मचारियों ने विधि विरुद्ध धार्मिक स्थल एवं टीन शेड हटाने की धमकी दी।
उधर, प्रशासन की ओर से एपीपी कांता बोथरा हनुमान पोटलिया एवं माडीबाई मिर्धा कॉलेज के अधिवक्ता भंवरलाल चौधरी व निम्बाराम काला ने अलग-अलग जवाब पेश कर बताया कि कॉलेज परिसर की जमीन पर किसी प्रकार का धार्मिक स्थल या अन्य किसी के नाम से कोई भूमि मौजूद नहीं है और न ही अभिकथित पड़ौसी हनीफ खां नाम के किसी व्यक्ति का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है।
न्यायालय ने ११ व १२ अक्टूबर को दोनों पक्षों की बहस एवं दलीलें सुनने के बाद निर्णय १४ अक्टूबर तक टाल दिया था। शनिवार को न्यायाधीश विजय कोचर ने निर्णय सुनाते प्रार्थी अली असगर द्वारा पेश हस्तगत प्रार्थना पत्र विरुद्ध अप्रार्थीगण आंशिक रूप से स्वीकार कर आदेश दिया कि ताफैसला वाद अप्रार्थीगण विधिक प्रक्रिया अपनाकर सक्षम आदेश पारित किए बगैर वादग्रस्त धार्मिक स्थल पर किए गए निर्माणात को हटाने अथवा क्षतिग्रस्त करने की कार्रवाई न करे। साथ ही न्यायालय यह स्पष्ट करना आवश्यक समझता है कि अप्रार्थीगण विधि अनुसार स्वयं में निहित अधिकारों एवं शक्तियों का प्रयोग कर विधि अनुसार कोई भी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।