अबूझमाड़ देश का सबसे ज्‍यादा नक्‍सल प्रभावित इलाका है।यहाँ नक्‍सलियों को ऐसा खौफ है कि एक दवा की दुकान तक नहीं थी इससे आप यहाँ के चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा की हालात का अंदाजा लगा सकते है।
अबूझमाड़ और इसके निवासी आज तक अपने आदिकालीन स्वरूप में हैं। अबूझमाड़ में कितने गांवों में किसके पास कितनी जमीन है, चारागाह या सड़कें हैं या नहीं, अन्य चीजों की उपलब्धता कैसी है, इसका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।
अबूझमाड़ देश का सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित इलाका है।यहाँ नक्सलियों को ऐसा खौफ है कि एक दवा की दुकान तक नहीं थी इससे आप यहाँ के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधा की हालात का अंदाजा लगा सकते है। नक्सलियों के खौफ के आगे यहां किसी की हिम्मत भी नहीं होती थी, मगर अब यहां माड़िया आदिवासी समुदाय की एक लड़की कुमारी किरता दोरपा ने दवाई की दुकान खोलने की साहसिक पहल की है।
इस बात का महत्व आप इसी बात से लगा सकते हैं की 80 के दशक में अबूझमाड़ के इलाके में प्रवेश के लिए कलेक्टर से अनुमति लेना पड़ता था हलांकि अब इस नियम को खत्म कर दिया गया है। कलेक्टर पीएस एल्मा ने किरता की इस पहल की प्रशंसा की है।