जिले में अब तक प्रशासन यूरिया समेत अन्य खाद की बढ़ती कालाबाजारी को रोकने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सका है।
black marketing of urea नरसिंहपुर. जिले में यूरिया की लगातार मांग बनी है, वितरण केंद्रों और गोदामों में जैसे ही यूरिया की खेप आने की खबर किसानों को मिल रही है तो भीड़ बढ़ रही है। खास यह है कि जिले में अब तक प्रशासन यूरिया समेत अन्य खाद की बढ़ती कालाबाजारी को रोकने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सका है। जिससे किसानों को यूरिया मिलना मुश्किल हो रहा है। विपणन के अधिकारी यह भी नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर कितने किसानों को टोकन दिए जा रहे हैं और कितनों को ऑफलाइन यूरिया मिल रहा है। गोदामों में खाद के स्टाक को भी प्रशासन जानबूझकर स्पष्ट नहीं कर रहा है। जिससे किसानों की समस्याओं को सामने आने से रोका जा सके।
शुक्रवार को नरसिंहपुर मंडी स्थित गोदाम में सुबह से ही किसानों की यूरिया लेने भीड़ रही। वितरण और पर्ची काउंटर पर किसानों की लाइन लगी रही। कई किसानों ने इस दौरान वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शिकवा-शिकायतें भी सुनाईं। किसानों का कहना रहा कि टोकन मिलने के बाद भी उन्हें समय पर यूरिया नहीं मिल रहा है। यही स्थिति एमपी एग्रो के वितरण केंद्र पर रही। जहां सुबह से किसान पहुंचे और दो-पांच बोरी यूरिया के लिए घंटो इंतजार करना पड़ा।
तीन गोदामों में चार दिन बाद वितरण शुरू
विपणन के नरसिंहपुर, करेली और सालीचौका गोदाम में चार दिन बाद शुक्रवार से यूरिया का वितरण चालू हुआ। विपणन के प्रबंधक अमित तिवारी का दावा है कि तीन गोदामों गोटेगांव और करकबेल, गाडरवारा में यूरिया पहले पहुंच गया था और वितरण हो रहा था। शुक्रवार को करीब 375 टोकन जारी हुए है। सभी किसानों को यूरिया समय पर उपलब्ध कराने प्रयास हो रहा है।