नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लगे पुस्तक मेले में महज 6 पुस्तक विक्रेताओं ने ही स्टाल लगाईं। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा...। देखें रिपोर्ट
narsinghpur news: नरसिंहपुर जिले में पालकों-अभिभावकों को नए शिक्षा सत्र में पुस्तकों-कॉपियों, बैग आदि शैक्षणिक सामग्री के मनमाने दामों से राहत देने शुक्रवार से पुस्तक मेले की शुरूआत हो गई है। लेकिन इन मेलों में पुस्तक विक्रेताओं की सीमित संख्या और बच्चों-पालकों की आवक में कमी से मेले शासन की मंशा पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।
नगर के नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लगे पुस्तक मेले में महज 6 पुस्तक विक्रेताओं ने ही स्टाल लगाईं। जिन पर खरीद करने आए पालक एक कमरे से दूसरे कमरे तक इस मंशा से घूमते रहे कि शायद छूट का लाभ राहत दे सके, लेकिन पुस्तकों पर 10 से 15 प्रतिशत तथा कॉपियों पर 30 से 50 प्रतिशत तक की ही छूट मिल सकी। मेले में दोपहर तक सिर्फ 92 बच्चों के पंजीयन हुए जबकि विभाग शाम तक पंजीयन की संख्या 650 के पार पहुंचने का दावा कर रहा है।
स्कूल के प्रवेश द्वार के सामने पंजीयन काउंटर बनाकर शिक्षकों को ड्यूटी दी गई कि वह आने वाले बच्चों का पंजीयन करें। अलग-अलग कमरे में पुस्तक विक्रेताओं ने अपनी-अपनी दुकान लगाई। धीरे-धीरे यहां बच्चों और पालकों की आवक बढ़ी। नगर के शास्त्री वार्ड निवासी देवीदास दो बालिकाओं के साथ यहां पहुंचे।
विक्रेताओं से आठवीं की पुस्तकों के बारे में पूछा तो कहा गया कि अभी आईं नहीं हैं, इंतजार करना पड़ेगा। देवीदास ने बताया कि आधी पुस्तकें होने की बात कही जा रही है। आधी का क्या करेंगे। मेले में पहुंचे अधिकांश पालकों ने कॉपियां-रजिस्टर, बैग आदि की ही खरीद की, कुछ पालक ही बच्चों के लिए पुस्तकों के सेट लेकर गए।
अपने पिता के साथ मेले में पहुंची कक्षा नवमीं की छात्रा अदिति ने बताया कि मेले में बुक नहीं मिली हैं, बाजार में भी नहीं है, वह केवी की छात्रा है। अब बाजार से ही लेना पड़ेंगी या ऑनलाइन बुलाएंगे। इसी तरह अन्य पालकों ने भी बच्चों के लिए कॉपियां-रजिस्टर खरीदने में ही अधिक रूचि दिखाई।
खरीदी करने आए एक पालक चंदन पाटकर ने बताया कि कक्षा सातवीं की पुस्तकों का सेट दुकान पर 2255 रुपए में मिल रहा था, मेले में आने पर 1975 रुपए में मिला, जितनी किफायत की उम्मीद थी वह नहीं रही लेकिन राहत है कि कुछ तो छूट मिली।
एक पालक ने बताया कि कक्षा चौथी का सेट 1521 रुपए में मिल गया, बाजार में 1789 रुपए का बिल बन रहा था। वहीं एक विक्रेता ने बताया कि 10 रजिस्टर का एक सेट 200 पेज का 450 रुपए में और 5 रजिस्टर का सेट 300 पेज का 350 रुपए में बेंच रहे हैं। जैसी-जैसी पुस्तकों की मांग हो रही है वह उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पुस्तके मेले में लोगों की कम आवक के पीछे बड़ी वजह मेला का उपयुक्त स्थान न होने के साथ ही प्रचार-प्रसार में कमी रही। जिससे मेले का लाभ ग्रामीण क्षेत्र के पालकों-बच्चों को नहीं मिल सका। शहरी क्षेत्र के पालक ही मेले में सीमित संख्या में पहुंच सके। वहीं एक वजह यह बताई जा रही है कि कई निजी स्कूलों में अभी भी परीक्षाएं चल रही हैं और कोर्स तय नहीं हुआ है। जबकि कुछ स्कूलों ने फरवरी माह में ही पुस्तकों का विक्रय करा दिया है।
खंड स्तरीय पुस्तक मेले का शुभारंभ डीइओ डॉ. अनिल कुशवाहा, डाइट प्राचार्य राजीव किशोर श्रीवास्तव, जिला परियोजना समन्वयक मनीष चौकसे, एडीपीसी विपनेश जैन बीईओ ब्रजेश शर्मा, विकासखंड स्रोत समन्वयक ओपी राय एवं प्राचार्य प्रीति नेमा ने फीता काटकर किया गया। डीइओ ने सुझाव दिया कि आगामी माह में पुस्तक मेले का आयोजन एक दिन और बढ़ाया जाए, जिससे अधिक से अधिक अभिभावक एवं विद्यार्थी इसका लाभ प्राप्त कर सकें।
6वीं-11वीं की पुस्तकों व कॉपियों को लेने आए हैं, खरीद पर छूट तो बताई जा रही है, लेकिन देखते हैं कि पुस्तकें पूरी मिल पाती हैं या नहीं, मेला पहले लगता तो और भी अच्छा होता।
-साजिद मंसूरी, पालक
6वीं और एलकेजी की पुस्तकें ली हैं, 3494 रुपए का बिल बना है, सभी बुक मिल गईं हैं, बाजार से खरीद के मुकाबले तो यहां से खरीद में राहत ही रही, छूट का लाभ मिला है।
शालू राय, पालक
कक्षा तीसरी के लिए 2350 रुपए में पुस्तकें खरीदी हैं। पुस्तकों और कॉपियों-रजिस्टर पर अलग-अलग छूट मिली है। यदि पुस्तक मेला में स्टॉल और भी होते तो निश्चित तौर पर लाभ मिलता।
रेखा लिहेटिया, पालक
बेटी के लिए बुक लेने आए थे लेकिन यहां कक्षा नवमीं की बुक नहीं मिली हैं इसलिए कॉपियां-रजिस्टर ही खरीदकर ले जा रहे हैं। जिससे बेटी के साथ यहां आना सार्थक हो, कुछ छूट मिले।
मुकेश कुमार लोधी, पालक
यह सही बात है कि मेले के प्रचार में कमी रही, निजी स्कूलों में अभी परीक्षाएं चलना भी समझ से परे हैं, हम जानकारी लेंगे। हमनें पुस्तक विक्रेताओं से कहा है कि जो छूट वह यहां दे रहे हैं वह दुकान पर भी दें ताकि शासन की मंशा पूरी हो। हम तय कर रहें हैं कि 12 जून के बाद फिर पुस्तक मेले लगाएंगे जिनकी अवधि अधिक रहेगी। जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके।
डॉ. अनिल कुशवाहा, डीइओ नरसिंहपुर