नरसिंहपुर

मुक्तिधाम न होने से 2 किमी दूर ले जाना पड़ता है शव, तेजी से विकसित हो रहे राजमार्ग चौराहा क्षेत्र के दुखद हालात

The long distance makes the funeral नरसिंहपुर. जिले में नेशनल हाइवे 44 और 45 को जोडऩे वाले राजमार्ग चौराहा क्षेत्र में आबादी और ऑलीशान भवन भले ही तेजी से बढ़ रहे हैं। दिनभर वाहनों की आवाजाही और रफ्तार दिखती है, लेकिन इसी चौराहे के किनारे बसे करीब 1200 लोगों के लिए दुख की घड़ी सबसे […]

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ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव लेकर जाते पीडि़त परिजन।

The long distance makes the funeral नरसिंहपुर. जिले में नेशनल हाइवे 44 और 45 को जोडऩे वाले राजमार्ग चौराहा क्षेत्र में आबादी और ऑलीशान भवन भले ही तेजी से बढ़ रहे हैं। दिनभर वाहनों की आवाजाही और रफ्तार दिखती है, लेकिन इसी चौराहे के किनारे बसे करीब 1200 लोगों के लिए दुख की घड़ी सबसे अधिक भारी पड़ती है। जनपद चांवरपाठा अंतर्गत ग्राम पंचायत लोलरी के इस क्षेत्र में आज तक मुक्तिधाम की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जब किसी घर से अंतिम यात्रा निकलती है, तो शोकाकुल परिजनों को लगभग 2 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लोलरी तक जाना पड़ता है। दूरी अधिक होने से शव यात्रा निकालना कठिन हो जाता है। ऐसा ही एक दुखद दिन शनिवार का रहा जब चौराहा क्षेत्र में वर्षो से रहने वाले परिवार को मुक्तिधाम की व्यवस्था न होने से शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में लेकर दो किमी दूर लोलरी गांव जाना पड़ा।
बताया जाता है कि राजमार्ग चौराहा निवासी राजेंद्र अग्रवाल की करीब 85 वर्षीय मां का निधन हो गया था। चौराहा क्षेत्र में कहीं मुक्तिधाम नहीं होने से शोक में डूबे परिजनों के सामने मां का अंतिम संस्कार करने शव लेकर गांव जाने की नौबत बनी। स्थानीय निवासी विमलेश पटेल ने कहा कि यहां करीब हजार- बारह सौ लोग निवास करते हैं, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। हर बार दूर जाना पड़ता है, जिससे दुख के समय अतिरिक्त कठिनाई उठानी पड़ती है। इस संबंध में कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि जीवन का अंतिम संस्कार कम से कम अपने ही क्षेत्र में सम्मानपूर्वक हो सके, यह उनकी मूलभूत अपेक्षा है। इस संबंध में ग्राम पंचायत लोलरी की सचिव उमा श्रीवास्तव ने बताया कि राजमार्ग क्षेत्र में शासकीय जमीन उपलब्ध नहीं है। जो जमीन है वह निजी और महंगी है, जिसे पंचायत खरीदने में सक्षम नहीं है। इसी कारण मुक्तिधाम निर्माण संभव नहीं हो पा रहा है।

Updated on:
22 Feb 2026 01:36 pm
Published on:
22 Feb 2026 01:35 pm
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