जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम का कार्य करीब तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा है। कार्य एंजेसी की लापरवाही अस्पताल में आने वाले मरीजों और कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा पर भारी पड़ रही है। फायर सेफ्टी व्यवस्था में करीब 80 फीसद कार्य ही अब तक हो सका है
Work on the fire safety system नरसिंहपुर. जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम का कार्य करीब तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा है। कार्य एंजेसी की लापरवाही अस्पताल में आने वाले मरीजों और कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा पर भारी पड़ रही है। फायर सेफ्टी व्यवस्था में करीब 80 फीसद कार्य ही अब तक हो सका है और जो कार्य शेष है वह कब पूरा होगा इसे लेकर प्रबंधन भी कुछ नहीं कह पा रहा है। लंबे समय से कार्य अधूरा पड़ा है।
बताया जाता है कि कार्य एजेंसी बचा हुआ काम पूरा करने में रुचि नहीं दिखा रही है और जिम्मेदार अधिकारी लंबे समय से साइट से गायब हैं। इसके चलते करोड़ों रुपए की सुरक्षा व्यवस्था अधर में लटकी हुई है। जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम का अधूरा रहना चिंता का विषय बना हुआ है। अस्पताल में प्रतिदिन जिले सहित पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था अब तक पूरी तरह संचालित नहीं हो सकी है। अस्पताल प्रबंधन दो टूक कह रहा कि जब तक सभी कार्य पूर्ण नहीं हो जाते, तब तक विभाग सिस्टम का हैंडओवर नहीं लेगा।
उपकरण लगे, लेकिन सिस्टम अब तक चालू नहीं
अस्पताल के नए और पुराने दोनों भवनों में फायर सेफ्टी लाइन बिछाई जा चुकी है। 55 से अधिक फायर बॉक्स, स्मोक डिटेक्टर, तापमान संकेतक उपकरण और अन्य सुरक्षा संसाधन लगाए गए हैं। आग लगने या धुआं फैलने की स्थिति में अलर्ट जारी करने तथा स्वचालित फव्वारा प्रणाली संचालित करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, लेकिन अधूरा कार्य होने के कारण पूरी प्रणाली का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
अस्पताल परिसर में पानी भंडारण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी विकसित की गई हैं, लेकिन अंतिम चरण के कार्य पूरे न होने से पूरा सिस्टम उपयोग में नहीं आ सका है। इससे तीन वर्ष बाद भी परियोजना का लाभ मरीजों और अस्पताल स्टाफ को नहीं मिल रहा है।
एक गेट वाले वार्ड और बंद लिफ्ट बढ़ा रहे जोखिम
जिला अस्पताल के नए भवन के कई वार्डों और यूनिट में प्रवेश और निकासी के लिए एक ही गेट संचालित है। आपात स्थिति में यह व्यवस्था परेशानी का कारण बन सकती है। वहीं नए भवन की लिफ्ट भी लंबे समय से बंद बताई जा रही है। बीते साल इलेक्ट्रिक ऑडिट भी हो चुकी है। ऐसे में आग या अन्य आपदा की स्थिति में सुरक्षा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
फायर सेफ्टी सिस्टम के अधूरे कार्य को पूरा कराने, एजेंसी की जवाबदेही तय करने और सिस्टम का शीघ्र संचालन शुरू कराने की मांग उठ रही है। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
वर्जन
अस्पताल प्रबंधन अधूरे कार्य का हैंडओवर नहीं लेगा। शेष कार्य पूर्ण होने के बाद ही पूरी प्रणाली विभाग को सौंपी जाएगी और उसके बाद संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पता चला है कि एंजेसी के भुगतान संबंधी कोई समस्या है जिसका निदान उच्च स्तर से होना है, इस वजह से कार्य प्रभावित है।