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सडक़ों पर बढ़ रहा श्वानों का आतंक, चार माह में 827 बने शिकार, बच्चे से बुजुर्ग तक निशाने पर

जिले में किसी शहर की गली-मोहल्ला हो या फिर गांव-कस्बों की गलियां हर जगह आवारा श्वानों का झुंड आसानी से दिख जाता है। जिनसे हर आने-जाने वाले को खतरा रहता है कि कहीं कोई श्वान उन्हें अपना शिकार न बना ले। जिले में बीते चार माह में ही श्वानों के हमले से करीब 827 लोग जख्मी हो चुके हैं।

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जिले में किसी शहर की गली-मोहल्ला हो या फिर गांव-कस्बों की गलियां हर जगह आवारा श्वानों का झुंड आसानी से दिख जाता है। जिनसे हर आने-जाने वाले को खतरा रहता है कि कहीं कोई श्वान उन्हें अपना शिकार न बना ले। जिले में बीते चार माह में ही श्वानों के हमले से करीब 827 लोग जख्मी हो चुके हैं।

शहर में इस तरह बना रहता है श्वानों का झुंड

dog attacks नरसिंहपुर. जिले में किसी शहर की गली-मोहल्ला हो या फिर गांव-कस्बों की गलियां हर जगह आवारा श्वानों का झुंड आसानी से दिख जाता है। जिनसे हर आने-जाने वाले को खतरा रहता है कि कहीं कोई श्वान उन्हें अपना शिकार न बना ले। जिले में बीते चार माह में ही श्वानों के हमले से करीब 827 लोग जख्मी हो चुके हैं। कुछ महिनों पूर्व जिला मुख्यालय पर ही आवारा और पालतू श्वानों के वैक्सीनेशन के लिए अभियान चलाया गया था। जो न तो अन्य निकायों में चल सका और न ही ग्रामीण क्षेत्र के लिए इस अभियान को महत्वपूर्ण मानकर अपनाया जा सका। जबकि नगरीय क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र में श्वानों के कारण लोग अधिक जख्मी होते हैं।
जिले में आवारा श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोग डॉग बाइट की घटनाओं से परेशान हैं। बीते वर्षो के आंकड़ों को देखें तो 2620 से अधिक घटनाएं दर्ज हुईं थीं। जबकि इस साल बीते चार माह में ही घटनाओं की संख्या करीब 827 तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे और राहगीर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई क्षेत्रों में आवारा श्वानों के झुंड लोगों पर हमला कर देते हैं। जिससे नागरिकों में भय का माहौल बना हुआ है। आवारा श्वानों का झुंड खासकर उन स्थानों पर अधिक दिखता है जहां उन्हें आसानी से भोजन उपलब्ध होता है, जैसे होटलों, मांस-मछली की दुकानों के आसपास। आबादी से लगे हाइवे-स्टेट हाइवे एवं ग्रामीण सडक़ें जहां से लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। कई बार सडक़ों के किनारे मौजूद श्वान राह चलते लोगों, वाहन चालकों के पीछे भी दौड़ते हैं जिससे एक खतरा यह भी बन जाता है कि वाहन चालक या राहगीर किसी वाहन की चपेट में न आ जाए।
आंकड़े जो बढ़ा रहे चिंता
जनवरी माह में श्वान काटने के मामलों में 5 वर्ष से कम आयु के 20 बालक प्रभावित हुए, जबकि 5 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 294 पुरुषों को श्वानों ने काटा। इसी अवधि में महिला वर्ग में 5 वर्ष से कम आयु की 10 बालिकाएं तथा 5 वर्ष से अधिक आयु की 82 महिलाएं व बालिकाएं श्वान के हमले का शिकार हुईं।
जनवरी में ही अन्य पशुओं के काटने से 41 लोग घायल हुए। इनमें 5 वर्ष से कम आयु के 7 बच्चे शामिल रहे, जबकि 5 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 34 महिला एवं पुरुष घायल हुए। फरवरी से अप्रेल माह तक की स्थिति और अधिक चिंताजनक रही। इस दौरान 5 वर्ष से कम आयु के 40 बालकों तथा 5 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 594 लोगों को श्वानों ने काटा। वहीं महिला वर्ग में 5 वर्ष से कम आयु की 19 बालिकाएं और 5 वर्ष से अधिक आयु की 174 महिलाएं व बालिकाएं श्वान हमलों का शिकार हुईं। इसी अवधि में अन्य पशुओं के काटने से करीब 126 लोग घायल हुए। इनमें 5 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित रहे, जिनकी संख्या 117 बताई गई है।
निकायो के जरिए होता है बधियाकरण
पशु चिकित्सा विभाग की मानें तो जिले में आवारा और पालतू श्वानों की संख्या 6 हजार से अधिक होगी। इनके बधियाकरण की प्रक्रिया नगरीय निकायो के जरिए होती है जो एनजीओ को कार्य सौंपते हैं और एनजीओ को ही बधियाकरण का कार्य करने डॉक्टर की व्यवस्था करना होती है। बताया जाता है कि नरसिंहपुर नगरीय निकास की ओर से जगह चयन की प्रक्रिया चल रही है, क्योंकि वहां हाल बनााया जाएगा और जो श्वान बधियाकरण के लिए लाए जाएंगे उनको दो दिन तक रखना होता है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्दी ही यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद बधियाकरण का कार्य शुरू हो सकता है।
काटने पर तुरंत करें यह उपाय
जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. गुलाब खातरकर ने बताया कि कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से 15 से 20 मिनट तक धोना चाहिए। घाव पर पट्टी नहीं बांधना चाहिए और तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी रेबीज टीकाकरण कराना जरूरी है।
डॉग बाइट से बचाव
आवारा श्वानों के झुंड से दूरी बनाए रखें
बच्चों को अकेले सुनसान क्षेत्रों में न भेजें
काटने पर घरेलू उपचार के भरोसे न रहें
तुरंत एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं
पालतू श्वानों का समय पर टीकाकरण कराएं

खतरा बढ़ाने वाली वजहें
शहर और गांवों में बढ़ती आवारा श्वानों की संख्या
खुले में फेंका जा रहा खाद्य अपशिष्ट
नसबंदी और नियंत्रण अभियान की धीमी रफ्तार
कई क्षेत्रों में लोगों में जागरूकता की कमी
वर्जन
कुछ माह पूर्व जो वैक्शीनेशन हुआ था वह नरसिंहपुर शहरी क्षेत्र में ही हुआ था, जिसमें एक हजार से अधिक आवारा व पालतू श्वानों को टीके लगाए गए थे। आवारा श्वानों का वैक्सीनेशन काफी मुश्किल से होता है।
डॉ. संजय मांझी, पशु चिकित्सक नरसिंहपुर
हमारे पास रैबीज के इंजेक्शन तो हैं लेकिन जितनी कमी है उसकी पूर्ति के लिए पत्र के जरिए मांग की गई है, जल्दी ही पूर्ति हो जाएगी। मरीजों को समय पर इंजेक्शन लगें यह हमारी प्राथमिकता है।
डॉ. मनीष मिश्रा, सीएमएचओ नरसिंहपुर
एनिमल बर्थ कंट्रोल सिस्टम बनाने के लिए जगह चिन्हित हो गई है। उसमें कुछ प्रक्रिया शेष है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होती है तो कार्य चाकू हो जाएगा।

नीलम चौहान, सीएमओ नगर पालिका नरसिंहपुर

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