
पीठ पर मरीज को ले जाते परिजन।
An Insensitive System नरसिंहपुर. जिले में 108 एंबुलेंस कर्मियों की मनमानी मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही है। शनिवार को जिला अस्पताल के आइसीयू वार्ड से जबलपुर रेफर हुई वृद्धा को लेने आई एंबुलेंस क्रमांक सीजी 04 एनएस 4594 चैनल गेट से काफी दूर खड़ी रही। वृद्धा को परिजन व्हीलचेयर से एंबुलेंस तक ले गए, लेकिन जैसे ही वृद्धा एंबुलेंस में सवार हुई तो एक कर्मी ने वृद्धा को आक्सीजन लगाने मास्क लगाया तो कहने लगा कि ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं है, सिलेंडर दूसरा लाना पड़ेगा, समय लगेगा, यह बात सुनकर मरीज के परिजनों का सब्र जबाब दे गया और वह वृद्धा को एंबुलेंस से उताकर पीठ पर अस्पताल के मुख्य गेट तक लाए और फिर ऑटो से सुभाष पार्क के पास स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज दौरान वृद्धा ने दम तोड़ दिया।
जिला अस्पताल परिसर में एंबुलेंस कर्मियों की असंवेदनशीलता और मनमानी की इस घटना ने उजागर कर दिया है कि जब अस्पताल परिसर में ही मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार हो रहा है तो एंबुलेंस कर्मी बाहर किस तरह पेश आते होंगे। मामला यह है कि ग्राम सूरवारी निवासी शम्मो बी पति राजे खान 65 वर्ष को ह्दयाघात के कारण परिजनों ने जिला अस्पताल के आइसीयू वार्ड में भर्ती कराया था। जहां इलाज के दौरान वृद्धा की स्थिति गंभीर देख उसे जबलपुर रेफर किया गया। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि एंबुलेंस आ गई है और वह मरीज को जबलपुर ले जाएं। मरीज के परिजन रेफर पर्ची लिए बाहर एंबुलेंस तलाशते रहे, यहां कई एंबुलेंस खड़ी होने से उन्हें काफी देर तो यही पता नहीं चला कि कौन सी एंबुलेंस उन्हें लेकर जाएगी।
दूर खड़े रहे कर्मचारी, व्हील चेयर से मरीज को पहुंचाया
इसी दौरान जब एंबुलेंस से दूर खड़े कुछ लोगों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि वही एंबुलेंस लेकर जाएंगे, मरीज को एंबुलेंस तक ले आइए, जैसे-तैसे मरीज व्हीलचेयर पर मरीज को लेकर पहुंचे तो सादे कपड़ों में आए एक एंबुलेंस कर्मी ने एंबुलेंस में अस्त-व्यस्त हालत में पड़े स्ट्रेचर पर वृद्धा को लिटाने परिजनों से बोल दिया, और खुद वृद्धा को मास्क लगाने लगा। इसी बीच जब बाहर मौजूद एक अन्य कर्मी मरीजों के परिजनों का माइंड डायवर्ट करने यह कहता रहा कि जबलपुर की दूरी अधिक है, जाने में समय लगेगा। इसके बाद भी जब परिजन जबलपुर ही जाने की बात करते रहे तो एंबुलेंस में मौजूद कर्मचारी जिसने मास्क लगाया था वह पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होने एवं सिलेंडर बुलाने की बात करने लगा। करीब आधा घंटे से परेशान मरीज के परिजनों ने जब यह बात सुनी तो वह भडक़ गए और वृद्धा को एंबुलेंस से उताकर पीठ पर लेकर परिसर से बाहर आ गए।
सीएमएचओ से हुई शिकायत तो कर्मी करने लगे बचाव
उक्त पूरे घटना की सूचना जब सीएमएचओ डॉ. मनीष मिश्रा को फोटो-वीडियो के साथ दी गई तो मौके पर मौजूद एंबुलेंस कर्मचारी यह कहते हुए अपना बचाव करने लगे कि ऑक्सीजन पर्याप्त है और मरीज के परिजन जबलपुर के बदले निजी अस्पताल तक छोडऩे दबाब बना रहे थे, जबकि एंबुंलेंस से मरीज को उतारते परिजन साफ तौर पर कह रहे हैं कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन कम होने की बात कही गई है। मरीज के परिजनों ने बताया कि जब एंबुलेंस कर्मियों द्वारा उन्हें जबलपुर की अधिक दूरी बताई जा रही थी। लेकिन जब वह जबलपुर जाने ही एंबुलेंस में सवार हो गए थे, लेकिन ऑक्सीजन की कमी बताई जाने लगी, जिससे उन्हें लाचारी में वृद्धा को पीठ पर लेकर अस्पताल के मुख्य गेट तक आना पड़ा और फिर ऑटो से निजी अस्पताल लेकर गए लेकिन वृद्धा की जान नहीं बच सकी। यदि मरीज एंबुलेंस में ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सीय सुविधाओं के साथ रेफर होकर पहुंचाया जाता तो शायद उसकी जान नहीं जाती। वृद्धा के परिजनों ने कहा है कि वह पूरे मामले की शिकायत करेंगे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी। जिससे अन्य किसी मरीज की इस तरह लापरवाही की बदौलत जान न जाए।
यह है एंबुलेंस सेवा का प्रोटोकॉल
जानकारों के अनुसार मरीजों को सुरक्षित और त्वरित उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है। मरीज को लेने के लिए एंबुलेंस अस्पताल के अधिकतम निकट पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि मरीज को अनावश्यक दूरी तक न ले जाना पड़े। रेफर मरीज, विशेषकर आइसीयू या गंभीर स्थिति वाले मरीज के लिए ऑक्सीजन, स्ट्रेचर, बेसिक लाइफ सपोर्ट उपकरण और जरूरी दवाएं पहले से उपलब्ध एवं कार्यशील स्थिति में होना चाहिए। मरीज को शिफ्ट करने से पहले ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क और अन्य जीवनरक्षक उपकरणों की जांच करना एंबुलेंस स्टाफ की जिम्मेदारी होती है। तकनीकी खराबी, ऑक्सीजन की कमी या अन्य बाधा की स्थिति में तत्काल वैकल्पिक एंबुलेंस या अतिरिक्त सिलेंडर उपलब्ध कराना आवश्यक माना जाता है। एंबुलेंस कर्मियों को मरीज और परिजनों के साथ संवेदनशील एवं सहयोगात्मक व्यवहार करना होता है। ड्यूटी के दौरान चालक और ईएमटी को निर्धारित यूनिफॉर्म, नेम प्लेट अथवा आईडी कार्ड के साथ ड्यूटी पर रहना चाहिए, ताकि उनकी पहचान स्पष्ट बनी रहे। किसी गंभीर मरीज को बीच प्रक्रिया में असहाय स्थिति में छोडऩा या अनावश्यक देरी करना सेवा मानकों के विपरीत है।
वर्जन
एंबुलेंस कर्मचारियों की मनमानी के संबंध में मैंनें खुद ही एक पत्र पिछले दिनों लिखा है, आप पूरे मामले की शिकायत कराइए, हम इस संबंध में कड़ी कार्रवाई करेंगे।
वर्जन
हमे कर्मियों ने बताया है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन थी, वो दूसरा पेशेंट भी लेकर गए थे।
विजय रघुवंशी, जिला कोऑर्डिनेटर 108 एंबुलेंस सेवा
Published on:
17 May 2026 12:58 pm
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