नरसिंहपुर. रसोई गैस की किल्लत के चलते शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में इंडक्शन चूल्हों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। घरों में भोजन बनाने के साथ ही अब बाजार में चाय.नाश्ता और चाट के ठेलों पर भी इंडक्शन का इस्तेमाल आम होता जा रहा है। हालांकि इस बढ़ते उपयोग के बीच सुरक्षा मानकों की […]
नरसिंहपुर. रसोई गैस की किल्लत के चलते शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में इंडक्शन चूल्हों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। घरों में भोजन बनाने के साथ ही अब बाजार में चाय.नाश्ता और चाट के ठेलों पर भी इंडक्शन का इस्तेमाल आम होता जा रहा है। हालांकि इस बढ़ते उपयोग के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक गंभीर चिंता बनकर उभर रही है। हाल ही में शहर के खैरी नाका क्षेत्र में एक घर में इंडक्शन चूल्हा फ टने की घटना सामने आई, जिसके बाद लोगों में भय का माहौल है। इसके बावजूद बिना पर्याप्त तकनीकी जानकारी के लोग लगातार इसका उपयोग कर रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार ढीली वायरिंग, ओवरलोड, कम वोल्टेज और खराब सॉकेट जैसी समस्याएं ऐसे हादसों के प्रमुख कारण हैं। इलेक्ट्रिकल एक्सपर्ट रवींद्र बिल्थरे का कहना है कि इंडक्शन चूल्हे का उपयोग करते समय सही पावर सॉकेट और उचित लोड क्षमता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वहीं इलेक्ट्रिशियन आनंद नामदेव के मुताबिक घर की वायरिंग की नियमित जांच और उपकरणों का सही तरीके से उपयोग ही दुर्घटनाओं से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि इंडक्शन चूल्हों के उपयोग में सावधानी बरतें और सुरक्षा मानकों का पालन करें। नियमित सफाई रखना, केवल इंडक्शन अनुकूल बर्तनों का उपयोग करना और उपकरण को सूखी जगह पर रखना बेहद जरूरी है। इसके अलावा चूल्हे को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए, क्योंकि इसकी सतह उपयोग के दौरान काफ ी गर्म हो जाती है।साथ ही पावर कॉर्ड को सही तरीके से लगाना और नमी से बचाना भी आवश्यक है। उचित वेंटिलेशन वाली जगह पर ही इंडक्शन का उपयोग करना चाहिए और हमेशा सही पावर सॉकेट का ही इस्तेमाल करना चाहिए। छोटी.छोटी सावधानियां अपनाकर बड़े हादसों से बचा जा सकता है।
इंडक्शन चूल्हे का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नियमित सफ ाई जरूरी है, ताकि सतह पर अवशेष खतरा न बनें।
केवल इंडक्शन अनुकूल बर्तनों का ही उपयोग करें।
चूल्हे की सतह गर्म होती है, इसलिए बच्चों को इससे दूर रखना आवश्यक है।
पावर कॉर्ड को सही तरीके से लगाएं और नमी से बचाएं।
चूल्हे को सूखी और ठंडी जगह पर रखें तथा वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
वायरिंग सही स्थिति में होनी चाहिए और उपकरण को हमेशा उपयुक्त पावर सॉकेट में ही चलाना चाहिए।