
मरीजों के साथ आने वाले अटेंडरों की भीड़ इस तरह गैलरी, वार्डो के आसपास रहती है।
control overcrowding नरसिंहपुर. जिला अस्पताल में मरीजों के साथ ही बढ़ रही अटेंडरों की भीड़ स्वास्थ्य अमले के सामने दोहरी चुनौतियां बना रही है। अस्पताल की गैलरी हो, वार्ड हो या फिर अन्य कोई हिस्सा हर जगह अटेंडरों की भीड़ दिन रात बनी रहती है। जिससे मरीजों के लिए जहां संक्रमण का खतरा रहता है वहीं कर्मचारियों को भी कार्य करने में मुश्किलें होतीं हैं। अस्पताल में भीड़ नियंत्रित करने अब अस्पताल प्रबंधन ने तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही नई व्यवस्था के अनुसार अस्पताल के दोनों भवनों में भर्ती मरीजों के साथ आने वाले अटेंडरों की संख्या सीमित होगी। एक मरीज के साथ केवल एक अधिकृत अटेंडर को ही वार्ड में रहने की अनुमति दी जाएगी, जबकि मरीजों से मिलने वालों के लिए निर्धारित समय तय किया जाएगा।
अस्पताल प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने पास सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है। मरीज की पर्ची बनते समय ही उसके अधिकृत अटेंडर का विवरण दर्ज किया जाएगा और उसी के आधार पर प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। इससे अस्पताल परिसर में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अस्पताल के वार्ड, गलियारे, ओपीडी क्षेत्र और प्रतीक्षालयों में बड़ी संख्या में अटेंडर मौजूद रहते हैं। इससे न केवल अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं, बल्कि मरीजों के उपचार में भी व्यवधान उत्पन्न होता है। कई बार भीड़ के कारण चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। भीड़ का आलम यह है कि करीब एक सप्ताह में ही यहां आने वाले मरीजों की संख्या 4342 से अधिक है जबकि उनके साथ आने वाले अटेंडरों की संख्या इससे चार गुनी है।
भीड़ बिगाड़ देती है सफाई व्यवस्था
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि भीड़ से सफाई व्यवस्था भी प्रभावित होती है। वार्डों और गलियारों में लगातार लोगों की आवाजाही से गंदगी बढ़ती है, जिससे संक्रमण नियंत्रण की चुनौती और गंभीर हो जाती है। इसके अलावा कुछ मामलों में कर्मचारियों के साथ विवाद तथा रात्रिकालीन समय में नशे की हालत में अस्पताल पहुंचने वाले लोगों के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पताल में अनुशासन, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी तथा मरीजों को अधिक सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
रैन बसेरा का निर्माण जल्द कराने जोर
जिला अस्पताल में कई स्थानों से मरीज आते हैं। उनके साथ जो मुख्य अटेंडर परिजन होते हैं उसके अलावा अन्य लोगों की आवक भी जब तक मरीज भर्ती रहता है बनी रहती है। अस्पताल परिसर में इन अटेंडरों को ठहरने कोई व्यवस्था नहीं है, रैन बसेरा का निर्माण चल रहा है और पीछे स्थित धर्मशाला कबाडख़ाना बन चुकी है। जिससे मरीजों के अटेंडर अस्पताल की गैलरी, वार्ड और अन्य हिस्सों में ही डेरा जमाए रहते हैं। उनके बार-बार वार्डो में आने-जाने का क्रम बना रहता है। कई मरीजों के अटेंडर तो वार्ड में भी रहते और सोते हैं। जिससे कर्मचारियों को भी परेशानी होती है।
भीड़ क्यों बढ़ाती है संक्रमण का खतरा
अस्पतालों में भर्ती अधिकांश मरीज पहले से ही किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में वार्डों और अस्पताल परिसर में अनावश्यक भीड़ कई प्रकार के संक्रमणों के प्रसार का कारण बन सकती है। अधिक लोगों की मौजूदगी से वायरस और बैक्टीरिया के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। वार्डों में भीड़ होने से स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन कठिन हो जाता है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों को अस्पताल जनित संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सकीय कार्यों में व्यवधान होता है। संक्रमण फैलने की स्थिति में मरीजों के साथ-साथ उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी भी प्रभावित हो सकते हैं।
यह हैं प्रमुख समस्याएं
वार्डों और गलियारों में अटेंडरों की अनियंत्रित भीड़
सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
संक्रमण नियंत्रण में कठिनाई
प्रस्तावित समाधान
एक मरीज के साथ केवल एक अधिकृत अटेंडर
अटेंडर के लिए पास सिस्टम
मरीजों से मिलने का निर्धारित समय
नियमों के पालन के लिए निगरानी व्यवस्था
वर्जन
अस्पताल में भीड़ को नियंत्रित करने कार्ययोजना सख्ती से लागू की जाएगी। क्योंकि यह मरीज, कर्मचारी के साथ ही व्यवस्था हित के लिए बेहद जरूरी है। रैन बसेरा का कार्य भी जल्दी कराने पूरा प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. राजकुमार चौधरी, सिविल सर्जन जिला अस्पताल
ओपीडी काउंटर से जब मरीज की पर्ची बनेगी तो वहीं से अटेंडर का पास भी बनेगा। मरीज से मिलने का समय सुबह-शाम तय होगा। वार्डो में भीड़ से कई तरह की समस्याएं होती हैं, गंदगी होना भी बड़ी समस्या है।
डॉ. राहुल नेमा, आरएमओ जिला अस्पताल नरसिंहपुर
Updated on:
05 Jun 2026 11:54 am
Published on:
05 Jun 2026 11:52 am
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