नरसिंहपुर

कहीं स्कूलों में टंकी-हैंडपंप का पानी पी रहे बच्चे तो कहीं वॉटर कूलर,शिक्षा विभाग नहीं पानी की जांच कराने गंभीर

water is tasteless नरसिंहपुर. स्कूल परिसर में हैंडपंप तो है लेकिन उसका पानी बेस्वाद है, बच्चे पानी नहीं पीते, ऊपर टंकी रखी है उसमें नगरपालिका की पाइप लाइन से पानी आता है, लेकिन सप्लाई का समय स्कूल खुलने व बंद होने के पहले होता है तो टंकी भरना मुश्किल हो जाती है। कभी-कभी तो जरूरत […]

3 min read
तलापार स्कूल में रखी पानी की टंकी।

water is tasteless नरसिंहपुर. स्कूल परिसर में हैंडपंप तो है लेकिन उसका पानी बेस्वाद है, बच्चे पानी नहीं पीते, ऊपर टंकी रखी है उसमें नगरपालिका की पाइप लाइन से पानी आता है, लेकिन सप्लाई का समय स्कूल खुलने व बंद होने के पहले होता है तो टंकी भरना मुश्किल हो जाती है। कभी-कभी तो जरूरत पर कैन बुला लेते हैं। यह स्थिति है तलापार माध्यमिक स्कूल की। जहां बच्चों के लिए पेयजल की कारगर व्यवस्था नहीं है। हैंडपंप की जांच कराने स्कूल से पत्र नगरपालिका को लिखा जा चुका है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका है कि हैंडपंप के पानी का स्वाद बदल जाए। नजदीक ही स्थित प्राइमरी स्कूल में भी पानी की व्यवस्था यही है। यहां भी टंकी रखी है। जिससे नल कनेक्शन है, लेकिन दोनों जगह बच्चों को पानी पीने के लिए प्लेटफार्म नहीं है। सीधे पाइप लाइन में नलों की टोंटियां लगा दी हैं ताकि एक साथ अधिक बच्चे पानी पी सकें।

परिसर में लगा हैंडपंप जिसका पानी बेस्वाद कहा जाता है।


इंदौर की घटना के बाद जहां हर स्तर पर पानी की शुद्धता परखने और बनाए रखने के लिए जांच करने गंभीरता दिखाई जा रही है। वहीं शिक्षा विभाग इस मामले में लाचार दिख रहा है। जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए पेयजल व्यवस्था मोटरपंप, टंकियों और हैंडपंपों के जरिए है। कुछ बड़े और प्रमुख स्कूलों में ही वॉटर कूलर लगे हैं और पेयजल व्यवस्था के अच्छे इंतजाम हैं। स्कूलों में रखीं टंकियों की समय-समय पर सफाई कराने का प्रबंधन दावा तो करता है लेकिन अधिकांश जगह टंकियों में सफाई तिथि अंकित नहीं हैं और न ही इसका रिकार्ड रखा जाता है। नगर के उत्कृष्ट विद्यालय, एमएलबी स्कूल, सांदिपनी विद्यालय स्टेशनगंज में तो पेयजल की अच्छी व्यवस्था है लेकिन कुछ अन्य स्कूलों में व्यवस्था काम चलाऊ है।

बच्चों के लिए पेयजल की कारगर व्यवस्था नहीं है।


साथ में पानी लेकर आते हैं अधिकांश बच्चे
स्कूलों में पढऩे वाले अधिकांश बच्चे अपने साथ पानी की बोतल लाते हैं। ऐसे बच्चों की संख्या कम ही रहती है जो पानी नहीं लाते और स्कूल में ही पानी पीते है। शिक्षक कहते हैं कि कई बच्चों को हैंडपंप या टंकी का पानी पसंद नहीं आता और वह घर से लाया गया पानी की पीना पसंद करते हैं। हालांकि अभी तक ऐसा कहीं मामले सामने नहीं आया है कि पानी की वजह से कोई बच्चा बीमार हुआ हो।
लक्ष्यपूर्ति के लिए हर माह सैंपल
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री आरके ठाकुर कहते हैं कि शिक्षा विभाग की ओर से तो अभी ऐसा कोई पत्र आना मेरे संज्ञान में नहीं है कि स्कूलों के पानी की जांच होना है। लेकिन विभाग अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए निरंतर सैंपल लेकर जांच करने की कार्रवाई करता है। तीन लैब में हर माह औसतन 800 से 900 तक तो सैंपल जांच हो ही जाती है, इनमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र दोनों शामिल होते हैं।
वर्जन
स्कूलों में पेयजल सप्लाई की जांच के संबंध में वैसे अभी तो पत्र जारी नहीं हुआ है, ऐसा कोई आदेश भी फिलहाल मेरे संज्ञान में नहीं है, दिखवाना पड़ेगा। पत्र आया होगा तो जांच के लिए आदेश जारी जरूर कराएंगे।
प्रतुल इंदुरख्या, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नरसिंहपुर

Published on:
31 Jan 2026 01:14 pm
Also Read
View All

अगली खबर