जिले में चार माह के दौरान करीब 263 सडक़ हादसे हो चुके हैं। जिनमें 97 लोगों ने जान गंवाई है जबकि करीब 308 लोग घायल हुए हैं। जिले में पहले से कई ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं और अब बढ़ते हादसों को देखते हुए रेड स्पॉट भी चिन्हित हो रहे हैं।
past four months, approximately 263 road accidents नरसिंहपुर. जिले में सडक़ हादसों को कम करने के लिए दशकों बाद भी न तो ठोस प्रबंध हो सकें हैं और न ही सुरक्षित यातायात के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है। सडक़ सुरक्षा समितियों की बैठकों में हादसे कम करने के लिए जरूरी कार्य कराने विभाग जिम्मेदारी तय कर निर्देश तो दिए जाते हैं लेकिन उन पर मैदानी स्तर तक कार्य कम ही दिखता है, कई विभाग निर्देशों की पूर्ति में औपचारिकता कर लेते हैं। जिससे जिले में हर दिन किसी न किसी सडक़ पर हादसे में लोग घायल हो रहे हैं। जिले में चार माह के दौरान करीब 263 सडक़ हादसे हो चुके हैं। जिनमें 97 लोगों ने जान गंवाई है जबकि करीब 308 लोग घायल हुए हैं। जिले में पहले से कई ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं और अब बढ़ते हादसों को देखते हुए रेड स्पॉट भी चिन्हित हो रहे हैं। जिससे ऐसे स्थानों पर हादसों की रोकथाम के लिए जरूरी प्रबंध किए जा सकें।
जिले में तीन हाइवे, एक स्टेट हाइवे समेत अन्य सडक़ों पर लगातार हादसे हो रहे हैं। जिसकी वजह वाहनों की तेज गति, नशे की हालत में वाहन चलाना, ओवरलोडिंग, यातायात नियमों की अनदेखी सहित सडक़ों की खराब हालत भी एक बड़ी वजह है। सडक़ सुरक्षा के नाम पर शासन-प्रशासन की बैठक होती हैं, अधिकारियों को निर्देश देकर जिम्मेदारी तय की जाती है, उन निर्देशों का कितना पालन हो रहा है इसकी समुचित निगरानी नहीं हो पाती। जिससे बैठके चलती रहती हैं, हादसे होते रहते हैं। जिले में ज्यादातर हादसे हाइवे-स्टेट हाइवे पर होते हैं, लेकिन दोनों ही विभागों के जिम्मेदार सडक़ों की स्थिति सुधारने, हादसों की संभावना बढ़ाने वाले स्थानों पर जरूरी सुरक्षा प्रबंध करने में पीछे रहते हैं।
मार्च में सर्वाधिक 29 मौतें
जानकारी के अनुसार बीते जनवरी माह में जिले में 78 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 99 लोग घायल हुए और 26 लोगों की मौत हुई। फरवरी में हादसों की संख्या में थोड़ी कमी आई और 53 दुर्घटनाओं में 57 लोग घायल हुए तथा 16 लोगों ने अपनी जान गंवाई। लेकिन मार्च का महीना सर्वाधिक घातक साबित हुआ। मार्च में 61 दुर्घटनाओं में 72 लोग घायल हुए और सबसे अधिक 29 लोगों की मौत दर्ज की गई। अप्रेल में 71 सडक़ दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 80 लोग घायल हुए और 26 लोगों ने अपनी जान गंवाई। हादसों में मृतकों और घायलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने और आमजन में सडक़ सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि हादसों को रोका जा सके।
जिले भर में रेड स्पॉट चिन्हित
बताया जाता है कि जिला सडक़ सुरक्षा समिति ने जिले में कुछ ऐसे स्थानों की पहचान की है, जो पिछले तीन वर्षों में हुई दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर रेड स्पॉट यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में सामने आए हैं। इन उच्च जोखिम वाले स्थानों पर दुर्घटनाओं को रोकने सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इन स्थानों में नरसिंहपुर-सागर हाइवे क्रमांक 44 पर कपूरी चौराहा, गिधवानी तिराहा, मगरधा तिराहा, बचई तिराहा, डिपो तिराहा, राजमार्ग चौराहा, चरगंवा तिराहा, लोक निर्माण विभाग के तहत आने वाले नंदवारा-उमरिया रोड, नरसिंहपुर-खैरीनाका रोड, नरसिंहपुर शहर में अस्पताल के सामने एवं नगरपालिका चौराहा, स्टेट हाइवे क्रमांक 22 पर सूरवारी चौराहा से पुलिया तक, मानेगांव तिराहा, पोडार तिराहा, जनकपुर तिराहा, शनि मंदिर के पास कामती रोड, कौडिय़ा, ढाबा के पास, वहीं गाडरवारा में बीटीआइ के सामने, कॉलेज रोड, नए बस स्टैंड के पास आदि स्थान रेड स्पॉट चिन्हित हैं।
फैक्ट फाइल
जनवरी 26 में कुल घटना- 78
घायल-99, मृत-26
फरवरी 26 में कुल घटना-53
घायल-57, मृत-16
मार्च 26 में कुल घटना-61
घायल-72, मृत-29
अप्रेल 26 में कुल घटना-71
घायल-80, मृत-26
वर्जन
जिले में ब्लैक स्पॉट 7 हैं, पहले संख्या 10 थी। तीन साल में 10 बड़ी घटनाएं जहां होती हैं उन स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जाता है। अभी रेड स्पॉट चिन्हित हुए हैं जहां पर घटनाएं रोकने जरूरी उपाय होना प्रस्तावित किया है। घटनाएं होने की वजह अलग-अलग होती हैं। बैठकों में जो निर्देश मिलते हैं उन पर कार्रवाई का पालन-प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को दिया जाता है। घटनाओं की रोकथाम करने जागरूकता कार्यक्रम, चालानी कार्रवाई भी निरंतर चलती है।
ममता तिवारी, यातायात थाना प्रभारी नरसिंहपुर