Narsinghpur-Sagar Highway नरसिंहपुर. जिले में सुधार कार्य की कमी के कारण लंबे समय से खस्ताहाल नरसिंहपुर-सागर हाइवे क्रमांक 44 पर डामरीकरण का कार्य चल रहा है। जिले में हाइवे की लंबाई करीब 80 किमी है। जिस पर यह कार्य बीते साल ही हो जाना था लेकिन कार्य पिछड़ा रहा और अब जाकर किया जा रहा […]
Narsinghpur-Sagar Highway नरसिंहपुर. जिले में सुधार कार्य की कमी के कारण लंबे समय से खस्ताहाल नरसिंहपुर-सागर हाइवे क्रमांक 44 पर डामरीकरण का कार्य चल रहा है। जिले में हाइवे की लंबाई करीब 80 किमी है। जिस पर यह कार्य बीते साल ही हो जाना था लेकिन कार्य पिछड़ा रहा और अब जाकर किया जा रहा है लेकिन इस दौरान मनमाने ढंग से फोरलेन पर वाहनों की आवाजाही का रूट बदले जाने से वाहन चालकों को दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ रही है। कार्य के दौरान डामरीकरण वाले रूट पर संकेतबोर्ड, दिशासूचक बोर्ड की कमी भी बनी है। जिससे कई बार वाहन चालक उसी रूट पर वाहन ले जाते हैं जहां पर कार्य चल रहा है और उन्हें फिर वाहन वापिस लेकर आना पड़ता है। हाइवे पर कई जगह कट प्वाइंट दूर होने से वाहन चालकों को सुरक्षित अपने रूट पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
जिले में खापा-मुंगवानी से लेकर झिराघाटी तक हाइवे की हालत जगह-जगह खराब है। कई जगह गड्ढे बने हैं और जिन गड्ढों को भरने का कार्य किया गया है उन पर थिगड़े इतने ऊपर हैं कि वाहन निकलते समय डर रहता है कि अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त न हो जाए। जिले में हाइवे पर ही व्हीकल अंडरपाथ का कार्य भी चल रहा है जिससे भी कई जगह वाहन चालकों के लिए जोखिमपूर्ण स्थिति बनी है। जो ब्रिज तैयार हो गए हैं उनके दोनों तरफ संकेत बोर्ड नहीं है। ब्रिज के नीचे से निकलने के दौरान वाहन चालकों को डर रहता है कि कहीं सामने से आने वाले किसी वाहन या राहगीर से टक्कर न हो जाए। खास यह है कि हाइवे पर चल रहे कार्य के संबंध में एनएचएआइ के जिम्मेदार अधिकारी कोई भी सूचना-जानकारी देने से भी बच रहे हैं। बताया जाता है कि डामरीकरण का जो कार्य अब जाकर हो रहा है वह दो साल पूर्व हो जाना था लेकिन कार्य पिछड़ता रहा। बीते साल कुछ हिस्सों में जहां कार्य किया गया वहां का डामर बारिश में ही धुल गया था। जिसके बाद फिर से सुधार कार्य कराया गया।
टूटे पड़े हैं कई जगह डिवाइडर
हाइवे पर कई जगह डिवाइडर भी टूटे पड़े हैं। नरसिंहपुर से लगे कपूरी तिराहा के पास कुछ साल पूर्व पुलिया बनाने के लिए कार्य शुरू हुआ था। उस दौरान वाहनों का रूट बदलने डिवाइडर तोड़ा गया लेकिन अब तक इसका सुधार नहीं किया गया है। इसी तरह हाइवे के अन्य हिस्सों में डिवाइडर की हालत खराब है। कई जगह तो कुछ महिनों पहले ही लगाईं गईं जालियां, रैलिंग भी खराब होने लगी है। जिससे आबादी क्षेत्र में हाइवे पर मवेशियों की मौजूदगी नहीं रूक रही है। जो नए ब्रिज तैयार हुए हैं उनके ऊपर भी डामर धसकने से गड्ढे दिखने लगे हैं।