नरसिंहपुर

अमले की कमी से विभाग बीमार, 195 पदों में 116 खाली, जिला अस्पताल में बेहतर इलाज मिलने में सबसे बड़ी बाधा

At the District Hospital नरसिंहपुर. जिला अस्पताल जहां हर दिन सैंकड़ों मरीज आते हैं, भवन-जांच के संसाधन बढ़ रहे हैं लेकिन यहां स्वीकृत पदों के मान से 60 फीसद अमला कम है। स्वास्थ्य विभाग अमले की कमी से लंबे समय से बीमार है। जिसका असर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज-सेवाएं मिलने पर भी हो […]

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जिला अस्पताल जहां अमले की कमी से व्यवस्थाएं बीमार हैं।

At the District Hospital नरसिंहपुर. जिला अस्पताल जहां हर दिन सैंकड़ों मरीज आते हैं, भवन-जांच के संसाधन बढ़ रहे हैं लेकिन यहां स्वीकृत पदों के मान से 60 फीसद अमला कम है। स्वास्थ्य विभाग अमले की कमी से लंबे समय से बीमार है। जिसका असर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज-सेवाएं मिलने पर भी हो रहा है। जो अमला कार्यरत है उस पर भी कार्य का दबाब रहता है, जिससे कर्मचारियों को हर दिन अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए भागदौड़ करना पड़ती है। हालत यह है कि विशेषज्ञों से लेकर चतुर्थ श्रेणी के करीब 116 पद रिक्त हैं। स्वीकृत पदों के मुकाबले कार्यरत कर्मियों की संख्या में कमी स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही है।
अस्पताल में स्वीकृत और कार्यरत अमले के आंकड़े कह रहे हैं कि जिला अस्पताल में प्रथम व द्वितीय श्रेणी अधिकारियों के करीब 59 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 34 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 25 पद रिक्त हैं। इस स्थिति का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। दंत रोग विशेषज्ञ के 2, स्किन रोग विशेषज्ञ का 1, नाक-कान-गला विशेषज्ञ के 2 और नेत्र रोग विशेषज्ञ के 2 पदों पर एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। मेडिकल स्पेशलिस्ट के 4 में से 3 पद रिक्त हैं, जबकि क्षय रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट के पद भी खाली हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ और सर्जिकल स्पेशलिस्ट के सभी पद भरे होने से इन विभागों में राहत है, लेकिन अन्य विभागों में कमी से मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है।
मेडिकल ऑफिसर के स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। करीब 19 स्वीकृत पदों में से केवल 11 पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 8 पद खाली हैं। इससे प्राथमिक उपचार सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर भी कमी बनी हुई है। प्रशासनिक अधिकारी का पद रिक्त है। जानकारी के अनुसार एक डॉक्टर लंबे समय से अनाधिकृत अनुपस्थित है, जिससे कार्य व्यवस्था और प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञ अमले की इस कमी से मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की स्थिति बनती है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए रिक्त पदों को शीघ्र भरने की जरूरत है। ताकि मरीजों को समय पर समुचित उपचार मिल सके।
तृतीय श्रेणी में स्वीकृत 53 पद में 32 रिक्त
तृतीय श्रेणी के कुल 53 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 21 पदों पर वर्तमान में कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 32 पद रिक्त पड़े हुए हैं। मुख्य लिपिक का 1 पद स्वीकृत है, जिस पर कोई कार्यरत नहीं है। लेखापाल के 3 स्वीकृत पदों पर भी कोई कार्यरत नहीं है। सहायक ग्रेड-02 के भी 3 पद स्वीकृत हैं, जिन पर कोई कार्यरत नहीं है और तीनों पद रिक्त हैं। स्टुवार्ड, बायोकेमिस्ट, स्टोर कीपर, इलेक्ट्रीशियन, वाहन चालक और एएसओ के भी एक-एक स्वीकृत पद रिक्त हैं, जिन पर कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं है। फार्मासिस्ट ग्रेड-02 के 8 स्वीकृत पदों में से केवल 1 पद ही भरा है, 7 पद रिक्त हैं।
चतुर्थ श्रेणी में 59 पद खाली, सिर्फ 24 भरोसे कार्य
चतुर्थ श्रेणी के कुल 83 स्वीकृत पदों में से 59 पद रिक्त हैं। वर्तमान में केवल 24 पद ही कार्यरत हैं। वार्ड बॉय के 30 स्वीकृत पदों में से मात्र 8 कार्यरत हैं, जिससे 22 पद रिक्त हैं। इसी प्रकार आया के 14 स्वीकृत पदों में से केवल 2 कार्यरत हैं, इस श्रेणी में 12 पद खाली हैं। स्वीपर के लिए 16 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 10 कार्यरत हैं और 6 पद रिक्त हैं। लैब अटेंडेंट के 4 स्वीकृत पदों में से 2 कार्यरत हैं। कई अन्य श्रेणियों में तो एक भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है। कुक महिला के 2 स्वीकृत पद, ओटी अटेंडेंट के 8 स्वीकृत पद, डार्क रूम अटेंडेंट का 1 स्वीकृत पद, क्लीनर का 1 स्वीकृत पद, चौकीदार का 1 स्वीकृत पद और धोबी के 4 स्वीकृत पद पूरी तरह रिक्त हैं, जिनमें कोई भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है।
वर्जन
अमले की कमी से कार्यो में समस्या तो निश्चित तौर पर आती है लेकिन हमारे पास जितना अमला है उससे बेहतर सेवाएं देने निरंतर प्रयास होता है। रिक्त पदों के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से शासन स्तर पर जानकारी भेजी जाती है। नियुक्तियां शासन स्तर से ही होती हैं।
डॉ. राजेंद्र डेहरिया, सहायक प्रबंधक जिला अस्पताल नरसिंहपुर

Published on:
10 Apr 2026 12:42 pm
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