नरसिंहपुर

बिना सेफ्टी इंतजामों के खुले में पड़े बायोफ्यूल के ढेर दे रहे हादसे को दावत

संपूर्ण जिले में आए दिन बायोफ्यूल के कच्चे माल, गन्ने की पतरोई तथा फ सलों के अपशिष्ट पदार्थों में आगजनी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। गत दिनों सालीचौका, पनागर क्षेत्र में किसानों के खेतों में खड़ी फ सलों में भी बड़ी आगजनी की घटना से लगभग 100 एकड़ से अधिक फ सल एवं किसानों […]

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Piles of biofuel lying

संपूर्ण जिले में आए दिन बायोफ्यूल के कच्चे माल, गन्ने की पतरोई तथा फ सलों के अपशिष्ट पदार्थों में आगजनी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। गत दिनों सालीचौका, पनागर क्षेत्र में किसानों के खेतों में खड़ी फ सलों में भी बड़ी आगजनी की घटना से लगभग 100 एकड़ से अधिक फ सल एवं किसानों के पाइप आदि का नुकसान हुआ है। आगजनी की घटनाओं ने पहले से ही ग्रामीणों और किसानों की धडकऩें तेज कर रखी थीं। इसी बीच गत माह 25 मार्च को करेली तहसील में हाइवे के पास बायोमॉस में लगी आग की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। ऐसे हादसों के बाद अब गाडरवारा क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की सांसें तेज हो गई हैं। गांवों और खेतों के आसपास बायोफ्यूल निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में सूखा कच्चा माल खुले में जमा किया जा रहा है, जिससे हर समय किसी बड़ी आगजनी और दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है।


खुले में पड़े ज्वलनशील बायोफ्यूल रॉ मटेरियल


मिली जानकारी अनुसार अनेक स्थान जैसे मोहपानी और डमरूघाटी केंकरा समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में खुले में पड़े ज्वलनशील बायोफ्यूल रॉ मटेरियल में आग भडकऩे की आशंका से लोगों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है बिना किसी ठोस सुरक्षा व्यवस्था के बायोफ्यूल व्यापारियों को मनमाने तरीके से कच्चामाल जमा करने की खुली छूट दी गई है। न तो मौके पर अग्निशमन यंत्र दिखते हैं और न ही फ ायर ब्रिगेड की कोई समुचित व्यवस्था नजर आती है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब करेली की आग से हुए बड़े नुकसान के बावजूद प्रशासन और जिम्मेदार विभाग आखिर क्यों मौन हैं। क्या किसी बड़े हादसे और जनहानि का इंतजार है। अनेेक किसानों का कहना है कि यदि खेतों के पास रखे इस ज्वलनशील कच्चे माल में आग लगती है, तो खड़ी फ सलें, पशुधन और ग्रामीणों के घर तक इसकी चपेट में आ सकते हैं। इससे हजारों किसानों की मेहनत और सालभर की कमाई पलभर में राख हो सकती है। स्थानीय लोगों ने जानना चाहा है कि बिना संसाधन, बिना फ ायर सेफ्टी और बिना आपातकालीन प्रबंधन के आखिर इनको अनुमति किसने दी, यदि अनुमति दी गई है, तो क्या संबंधित अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था या नहीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच, फ ायर सेफ्टी ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना के लिए प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। जनापेक्षा है ऐसे खुले में पड़े ज्वलनशील पदार्थों की जांच कर सुरक्षा के प्रबंध कराए जाएं।

Published on:
12 Apr 2026 01:49 pm
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