नरसिंहपुर. शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुधारने के लिए बनाई गई कचरा निष्पादन और परिवहन की योजना अब पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। जबलपुर के प्लांट तक कचरा भेजने की कार्ययोजना कागजों में सिमटकर रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पिछले एक वर्ष से ट्रेंचिंग ग्राउंड से कचरे […]
नरसिंहपुर. शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुधारने के लिए बनाई गई कचरा निष्पादन और परिवहन की योजना अब पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। जबलपुर के प्लांट तक कचरा भेजने की कार्ययोजना कागजों में सिमटकर रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पिछले एक वर्ष से ट्रेंचिंग ग्राउंड से कचरे का उठाव तक नहीं हो पाया है। इस स्थिति ने शहर के बाहर स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड को कचरे के पहाड़ में तब्दील कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, कचरा संग्रहण कार्य में लगातार लापरवाही के चलते नगरपालिका परिषद ने करीब एक साल पहले निजी कचरा संग्रहण कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया था। इसके बाद से शहर में डोर.टू.डोर कचरा संग्रहण की जिम्मेदारी स्वयं नगरपालिका प्रशासन संभाल रहा है। हालांकि, संग्रहण तो किसी तरह किया जा रहा है, लेकिन कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
ट्रेंचिंग ग्राउंड पर वर्तमान में बड़ी मात्रा में कचरा डंप किया जा रहा है, लेकिन वहां स्थापित निष्पादन इकाइयां लंबे समय से ठप पड़ी हैं। इसके चलते न तो कचरे का पृथक्करण हो पा रहा है और न ही जैविक कचरे से खाद निर्माण की प्रक्रिया संचालित हो रही है। परिणामस्वरूप, दिन-ब-दिन कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा है और यह क्षेत्र एक बड़े प्रदूषण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। कचरे के ढेर में अक्सर आग लग जाती है, जिससे उठने वाला जहरीला धुआं आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। इसका सीधा असर आसपास के रहवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, वहीं पर्यावरण पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है।
नगरपालिका द्वारा जबलपुर स्थित कठौंदा प्लांट तक कचरा भेजने की जो योजना बनाई गई थी, वह भी अमल में नहीं आ सकी। परिवहन और समन्वय के अभाव में यह व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। ऐसे में शहर का सारा कचरा स्थानीय स्तर पर ही जमा हो रहा है, जिससे समस्या और विकराल होती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही कचरा निष्पादन की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। फि लहाल जरूरत इस बात की है कि नगरपालिका प्रशासन ठोस कदम उठाते हुए निष्पादन इकाइयों को पुन: चालू करे और कचरा प्रबंधन की ठोस एवं स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करे।