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Abhijit Deepke FIR: FIR के बाद अभिजीत दीपके का सीधा चैलेंज- ‘जेल भेजेंगे तो चला जाऊंगा’, स्कूल अभियान नहीं रुकेगा

Abhijit Deepke Jail Statement: स्कूलों की तस्वीरें और वीडियो सामने लाने को लेकर अभिजीत दीपके ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। महाराष्ट्र के बाद पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना तक अभियान ले जाने की बात भी उन्होंने कही है।
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Aug 27, 2026
Abhijit Deepke
Abhijit Deepke FIR : ‘जेल भेजेंगे तो चला जाऊंगा’, स्कूल अभियान नहीं रुकेगा! (फोटो सोर्स: ANI)

School Theek Karo Campaign: महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर चल रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान ने अब सियासी और प्रशासनिक बहस को तेज कर दिया है। अभियान के संस्थापक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर के बीच ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे मामले को और सुर्खियों में ला दिया। उनका कहना है कि वह अमेरिका से ही इस मानसिक तैयारी के साथ लौटे थे कि उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। इसके बावजूद अभियान जारी रखने का उनका दावा है।

'जेल भेजेंगे तो चला जाऊंगा', एफआईआर पर दीपके का दो टूक जवाब

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर बेबाक रुख अपनाया है। वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह अमेरिका से भारत लौटते समय ही मानसिक तौर पर तैयार थे कि उन्हें जेल जाना पड़ सकता है।

दीपके का कहना है कि जब तक वह बाहर हैं, इस समय को वह स्थायी आजादी नहीं बल्कि ‘लीज पर मिला समय’ मानते हैं। उनका दावा है कि स्कूलों की स्थिति सामने लाने के अभियान से पीछे हटने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर अभियान के चलते उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है तो वह इसके लिए तैयार हैं।

स्कूलों में एंट्री और वीडियो पर रोक को लेकर सरकार पर निशाना

स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में जाकर वहां की सुविधाओं और कमियों को दिखाने की कोशिश की जा रही है। दीपके ने स्कूलों में प्रवेश और वीडियो बनाने को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि स्कूलों में शौचालय खराब हैं, बेंच उपलब्ध नहीं हैं या शिक्षकों की कमी है, तो इन स्थितियों को सामने लाने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उनका तर्क है कि यदि स्कूलों में व्यवस्था बेहतर है तो तस्वीरें और वीडियो सरकार के काम की तारीफ ही करेंगे।

दीपके ने प्रतिबंधों की तुलना गंभीर अपराध के बाद सबूत छिपाने की मानसिकता से करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि समस्याओं को सार्वजनिक होने से रोकने के बजाय उनका समाधान किया जाना चाहिए। हालांकि, यह उनके द्वारा की गई राजनीतिक टिप्पणी है और इस तुलना को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा अभियान

दीपके से जब सवाल किया गया कि उनका अभियान भाजपा शासित राज्यों पर ही केंद्रित क्यों दिखाई देता है और पंजाब जैसे आम आदमी पार्टी शासित राज्य में वे क्यों नहीं जा रहे, तो उन्होंने इसका जवाब अपनी प्राथमिकताओं से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना में भी अभियान चलाया जाएगा। लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता वह क्षेत्र है जहां वह खुद रहते हैं। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के स्कूल की समस्या पर आवाज नहीं उठाता और सीधे पूरे देश में अभियान शुरू कर देता है, तो उसके अपने गांव के लोग ही उससे सवाल करेंगे।

दीपके ने यह भी कहा कि पंजाब में भाजपा नेताओं को वहां के स्कूलों की स्थिति देखने के लिए जाना चाहिए। इस बयान के जरिए उन्होंने यह संकेत दिया कि अभियान को भविष्य में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकार वाले राज्यों तक ले जाने की उनकी योजना है।

'पहले अपना घर, फिर देश' वाला तर्क

दीपके के बयान का एक अहम पहलू यह है कि वह अपने अभियान की शुरुआत स्थानीय स्तर से करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका तर्क है कि किसी बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर बोलने से पहले अपने आसपास की समस्याओं को उठाना जरूरी है।

यही वजह है कि महाराष्ट्र में अभियान को लेकर पैदा हुआ विवाद उनके लिए केवल एफआईआर का मामला नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है।

Updated on:
27 Aug 2026 10:32 am
Published on:
27 Aug 2026 10:25 am