नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है। दोनों पायलटों को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से हटा दिया गया है।
Air India Flight: 14 जून को एयर इंडिया की दिल्ली-वियना उड़ान (AI-187) ने एक खतरनाक स्थिति का सामना किया, जब टेकऑफ के तुरंत बाद यह विमान लगभग 900 फीट नीचे आ गया। यह घटना अहमदाबाद में हुए एक घातक विमान हादसे के मात्र 38 घंटे बाद हुई, जिसमें 12 जून को लंदन जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने से 270 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस घटना ने विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और एयर इंडिया की परिचालन प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सुबह 2:56 बजे उड़ान भरने के बाद, विमान को तूफानी मौसम के बीच कई गंभीर चेतावनियां मिलीं। इनमें "स्टिक शेकर" और ग्राउंड प्रॉक्सिमिटी वार्निंग सिस्टम (GPWS) से दो बार "डॉन्ट सिंक" अलर्ट शामिल थे। इस दौरान विमान ने अपनी प्रारंभिक चढ़ाई के दौरान 900 फीट की ऊंचाई खो दी। हालांकि, पायलट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विमान को स्थिर किया और नौ घंटे आठ मिनट की उड़ान के बाद यह सुरक्षित रूप से वियना में उतर गया।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है। दोनों पायलटों को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से हटा दिया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल "टर्बुलेंस के कारण स्टिक शेकर" का उल्लेख किया गया था, लेकिन फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) की गहन जांच में स्टॉल और GPWS चेतावनियों का खुलासा हुआ।
एयर इंडिया ने एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को मामले की जानकारी दिए जाने के बाद "नियमों के अनुरूप" की गई। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, "पायलट की रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों के अनुसार डीजीसीए को मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद विमान के रिकॉर्डर से डेटा प्राप्त होने पर आगे की जांच शुरू की गई। जांच के नतीजे आने तक पायलटों को रोस्टर से हटा दिया गया है।"
बता दें कि 12 जून को अहमदाबाद में लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में 275 लोगों की मौत हो गई थीं। इस हादसे के बाद डीजीसीए ने विमान की सुरक्षा को लेकर विशेष निर्देश जारी किया।