
BCI Chairman Manan Kumar Mishra Resignation: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सह-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाईआर सदाशिव रेड्डी ने BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। शनिवार को रेड्डी ने काह कि देश का बार इससे बेहतर का हकदार है। इस दौरान उन्होंने मनन मिश्रा के नेतृत्व में परिषद के कामकाज को लेकर कई गंभीर आरोप और सवाल उठाए हैं।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, वाईआर सदाशिव रेड्डी ने आरोप लगाया है कि BCI के करीब 150 करोड़ रुपये के फंड को एक निजी ट्रस्ट में स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, जिसे चेयरमैन से जुड़े लोगों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने परिवार के सदस्यों की कथित नियुक्तियों, लॉ कॉलेजों से कथित तौर पर 'योगदान' लिए जाने और NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के मामले में जारी विवादित निर्देश को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
रेड्डी ने कहा कि वह यह पत्र किसी व्यक्तिगत विरोध या दुश्मनी के कारण नहीं लिख रहे हैं। उन्होंने खुद को BCI के निर्वाचित सदस्य और तीन दशक से अधिक समय से कानून के पेशे से जुड़े व्यक्ति के तौर पर बताते हुए कहा कि इस मामले में चुप रहना देशभर के अधिवक्ताओं द्वारा उन पर जताए गए भरोसे के साथ न्याय नहीं होगा।
रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा से पत्र मिलने के 15 दिनों के भीतर पद से इस्तीफा देने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने उठाए गए मुद्दों पर चर्चा के लिए BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग भी की है।
रेड्डी ने अपने पत्र में कहा कि परिषद अपने उस मानक से काफी दूर चली गई है, जिसकी उससे उम्मीद की जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मिश्रा से चेयरमैन पद से इस्तीफा देने को कहा है। रेड्डी के मुताबिक, यदि मौजूदा आरोप सही हैं तो यह संस्थागत स्तर पर बेहद गंभीर मामला है और इसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
रेड्डी ने BCI की वेबसाइट पर परिषद के कर्मचारियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि संस्था के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी जानकारियां सार्वजनिक होना जरूरी है।
रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मिश्रा 2012 से लगातार चेयरमैन पद पर बने हुए हैं, जबकि पद का कार्यकाल दो साल का बताया गया है। उन्होंने टिप्पणी की कि अगर कोई निर्वाचित पद 14 वर्षों तक एक ही व्यक्ति के पास रहता है, तो वह वास्तविक अर्थों में निर्वाचित पद नहीं रह जाता।