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बंगाल में क्या है ‘कट मनी प्रथा’, जिस पर CM शुभेन्दु ने लिया एक्शन, दी चेतावनी

Bengal CM Suvendu Adhikari: बंगाल में की कट मनी और भ्रष्टाचार के आरोप फिर तेज हो गए हैं, जहां CM शुभेन्दु अधिकारी ने TMC पर सख्त कार्रवाई और डिजिटल सबूत के आधार पर जांच की बात कही है।

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May 19, 2026
बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी (ANI)

Bengal Cut Money: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर ‘कट मनी’ का मुद्दा सुर्खियों में है। विधानसभा चुनावों के दौरान यह आरोप लगातार सामने आते रहे कि राज्य में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए कथित तौर पर अवैध कमीशन या कट मनी की मांग की जाती थी। इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने एक बार फिर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला है।

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भ्रष्टाचार पर सख्ती से कार्रवाई

भवानीपुर क्षेत्र में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेन्दु अधिकारी ने दावा किया कि अगर कट मनी या भ्रष्टाचार से जुड़े पुख्ता डिजिटल सबूत मिलते हैं, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई तभी की जाएगी जब लेनदेन से जुड़े दस्तावेज या डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी।

कट मनी प्रथा खत्म करने का वादा

शुभेन्दु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से कट मनी जैसी गलत वसूली व्यवस्था चलती रही है, जिसे अब खत्म करने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी इस तरह की किसी भी जबरन वसूली और भ्रष्टाचार की व्यवस्था को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कई तीखे बयान दिए, जिनमें उनके चुनावी प्रदर्शन और राजनीतिक भविष्य को लेकर टिप्पणियां शामिल थीं।

क्या है कट मनी प्रथा?

कट मनी एक अनौपचारिक और अवैध कमीशन प्रणाली को कहा जाता है, जिसमें सरकारी योजनाओं या विकास कार्यों के नाम पर लाभार्थियों या ठेकेदारों से नकद कमीशन वसूला जाता है। यह पूरी तरह गैरकानूनी माना जाता है, इसमें किसी भी प्रकार का आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता, लेन-देन अक्सर नकद में किया जाता है, यह भ्रष्टाचार का एक गंभीर रूप माना जाता है।

धर्म के आधार पर नहीं मिलेगा सरकारी लाभ

पश्चिम बंगाल सरकार ने धर्म के आधार पर दी जाने वाली सरकारी सहायता को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह फैसला 1 जून से लागू होगा। इसके तहत राज्य में इमामों और मुअज्जिनों को मिलने वाला भत्ता तथा पुजारियों का मानदेय बंद कर दिया जाएगा। ये सभी योजनाएं ममता बनर्जी सरकार के दौरान शुरू की गई थीं। पहले ममता सरकार इमामों को हर महीने 3,000 रुपये, मुअज्जिनों को 1,500 रुपये और पुजारियों को 2,000 रुपये का भत्ता प्रदान करती थी।

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Published on:
19 May 2026 09:06 am
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