
Supreme Leader Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ali Khamenei) के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, इस पर चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है। भारत सरकार ने इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन (Syed Ata Hasnain) और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा (Pabitra Margherita) को आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में नामित किया है। ईरान ने इस चार दिवसीय राजकीय कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा था।
ईरानी मीडिया के अनुसार, अयातुल्लाह खामेनेई के सम्मान में आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होंगे।
4 और 5 जुलाई: तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला प्रार्थना हॉल में श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी।
6 और 7 जुलाई: तेहरान और पवित्र धार्मिक शहर क़ोम में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।
9 जुलाई: अंतिम संस्कार का समापन मशहद में होगा, जहां खामेनेई को शिया मुसलमानों के आठवें इमाम इमाम रज़ा की पवित्र दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी। इसके बाद क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालात के चलते उनका अंतिम संस्कार टाल दिया गया था। अब करीब 116 दिन बाद उनका राजकीय अंतिम संस्कार आयोजित किया जा रहा है।
अयातुल्ला अली खामेनेई ने लगभग 36 सालों तक ईरान के सुप्रीम लीडर के रूप में देश का नेतृत्व किया। 86 साल की उम्र में उनके निधन के बाद मार्च में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया।
खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई अहम मुद्दों पर लंबे समय से सहयोग रहा है।
भारत की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे सैयद अता हसनैन भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं। वहीं पबित्रा मार्गेरिटा विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में भारत की कूटनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
116 दिनों के बाद होने जा रहे अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि उनका इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का विदेश दौरा पहले से निर्धारित है। साथ ही माना जा रहा है कि फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का इस कार्यक्रम में शामिल होना अमेरिका और इजराइल के साथ भारत के मजबूत संबंधों पर भी असर डाल सकता है।