राष्ट्रीय

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं जाएंगे PM नरेंद्र मोदी? जानिए क्या है भारत की रणनीति

Iran Supreme Leader Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे। जानिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों नहीं हो रहे शामिल।
2 min read
Jun 29, 2026
Ali Khamenei
सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत से कौन होगा शामिल (ANI)

Supreme Leader Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ali Khamenei) के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, इस पर चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है। भारत सरकार ने इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन (Syed Ata Hasnain) और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा (Pabitra Margherita) को आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में नामित किया है। ईरान ने इस चार दिवसीय राजकीय कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा था।

4 जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम

ईरानी मीडिया के अनुसार, अयातुल्लाह खामेनेई के सम्मान में आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होंगे।

4 और 5 जुलाई: तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला प्रार्थना हॉल में श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी।
6 और 7 जुलाई: तेहरान और पवित्र धार्मिक शहर क़ोम में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।
9 जुलाई: अंतिम संस्कार का समापन मशहद में होगा, जहां खामेनेई को शिया मुसलमानों के आठवें इमाम इमाम रज़ा की पवित्र दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

116 दिन बाद होगा अंतिम संस्कार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी। इसके बाद क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालात के चलते उनका अंतिम संस्कार टाल दिया गया था। अब करीब 116 दिन बाद उनका राजकीय अंतिम संस्कार आयोजित किया जा रहा है।

36 सालों तक रहे ईरान के सुप्रीम लीडर

अयातुल्ला अली खामेनेई ने लगभग 36 सालों तक ईरान के सुप्रीम लीडर के रूप में देश का नेतृत्व किया। 86 साल की उम्र में उनके निधन के बाद मार्च में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया।

खामेनेई कब और कहां मारा गया ?

भारत-ईरान संबंधों के लिए अहम माना जा रहा यह दौरा

खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई अहम मुद्दों पर लंबे समय से सहयोग रहा है।

भारत से ये दो नेता कर रहे प्रतिनिधित्व

भारत की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे सैयद अता हसनैन भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं। वहीं पबित्रा मार्गेरिटा विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में भारत की कूटनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

क्यों शामिल नहीं हो रहे प्रधानमंत्री मोदी?

116 दिनों के बाद होने जा रहे अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि उनका इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का विदेश दौरा पहले से निर्धारित है। साथ ही माना जा रहा है कि फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का इस कार्यक्रम में शामिल होना अमेरिका और इजराइल के साथ भारत के मजबूत संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

Also Read
View All
Ketan Agarwal Murder Case: कोर्ट में पेशी से पहले आरोपी सिया के बचाव में वकील ने क्या कहा? ताजा दलील से अभी भी पलट सकता है केस!

ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे पीएम मोदी, फिर भी जानें क्यों बेटे मोजतबा ने कहा धन्यवाद

राम मंदिर का चढ़ावा चोरी हुआ तो इससे बीजेपी का क्या लेना-देना? भाजपा उपाध्यक्ष की दो टूक

बंगाल में OBC कैटेगरी के तहत 113 वर्गों को नहीं मिलेगा आरक्षण, विधानसभा में पास हुआ पिछड़ा वर्ग संशोधन बिल

10वीं के छात्रों को नहीं देनी होगी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा, CBSE ने जारी की नई गाइडलाइन, जानें क्या-क्या बदला