
पंजाब (Punjab) में बीजेपी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के बीच गठबंधन की संभावनाएं सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर आकर टिक गई हैं। बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल गठबंधन पर खुलकर कुछ नहीं कह रहा है, वहीं पार्टी की पंजाब इकाई अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ने की पैरवी कर रही है। गौरतलब है कि पार्टी सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कहती आ रही है। हालांकि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) की मुलाकात और इसके बाद शिरॉमी अकाली दल का महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में खड़ा होना दोनों दलों के बीच बढ़ती नज़दीकी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
दोनों दलों के रणनीतिकार मानते हैं कि पंजाब में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन चुनावी तौर पर मज़बूत साबित हो सकता है। बीजेपी को राज्य के शहरी इलाकों में मज़बूत माना जाता है, जबकि शिरोमणि अकाली दल की पकड़ ग्रामीण और पारंपरिक सिख मतदाताओं के बीच रही है। ऐसे में दोनों दलों का सामाजिक और भौगोलिक आधार एक-दूसरे का पूरक बन सकता है।
सबसे बड़ी अड़चन सीटों के बंटवारे को लेकर है। शिरोमणि अकाली दल पहले बीजेपी को 23 विधानसभा सीटें देता रहा है और इसी फॉर्मूले को आगे बढ़ाने की इच्छा रखता है। बीजेपी अब इस संख्या से काफी आगे बढ़कर सीटों पर दावा कर रही है। पार्टी के रणनीतिकारों की ओर से 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पहले या दूसरे स्थान पर रहने वाली 54 विधानसभा सीटों को संभावित दावे के आधार के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के मुताबिक पहले भी पार्टी एक बार 23 में से 17 सीटें जीत चुकी है। अभी कांग्रेस (Congress) में अंसतोष और आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के विरोध में चल रही लहर के चलते पार्टी अच्छी सीटें जीत सकने की स्थिति में है।
एक पूर्व मंत्री और एक केंद्रीय मंत्री की अनौपचारिक स्तर पर बातचीत हो रही है। अकेले लड़ने पर सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा घटनाक्रम से वाकिफ बीजेपी के एक अन्य नेता के अनुसार पार्टी की आंतरिक चर्चाओं में करीब 40 से 47 विधानसभा सीटों को बीजेपी के प्रभाव वाली मजूबत सीटों के तौर पर चिन्हित किया गया है। ऐसे में बीजेपी के लिए पुराने 23 सीटों के फॉर्मूले पर लौटना आसान नहीं होगा। पार्टी का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में उसका संगठन और चुनावी प्रभाव पंजाब में बढ़ा है। वहीं एक धड़ा कह रहा है कि पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति में त्रिकोणीय मुकाबले में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर सकती है।