
गर्मी (Photo - ANI)
ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) दुनियाभर में परेशानी की वजह बनी हुई है। इस वजह से दुनियाभर में बढ़ती गर्मी (Heat) ने लोगों के हाल बेहाल कर रखे हैं। वैश्विक तापमान वृद्धि बड़ा मुद्दा बनी हुई है। यूरोप (Europe) में गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। अमेरिका (United States of America) में भी लोगों का गर्मी की वजह से बुरा हाल है। गर्मी की वजह से इस साल अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसी बीच अमेरिकी स्पेस रिसर्च एजेंसी नासा (NASA) की एक नई रिपोर्ट में एक नई बात सामने आई है।
नासा की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में ग्लोबल वॉर्मिंग के बुरे असर के बीच भारत (India) में गर्मी बढ़ने की गति दूसरे देशों की तुलना में बेहद कम है। जलवायु और इसमें होने वाले परिवर्तन पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक इसे विशेष प्राकृतिक घटना मानते हुए वॉर्मिंग होल (Warming Hole) नाम दे रहे हैं। नासा के अनुसार वर्ष 1980 के बाद पृथ्वी का तापमान करीब 1.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है। वहीं भारत में 20वीं सदी की शुरुआत से अब तक तापमान में वृद्धि 0.9 डिग्री सेल्सियस से भी कम वृद्धि रही है। इस रिसर्च में नासा के साथ विश्व की कई बड़ी यूनिनवर्सिटीज़ के वैज्ञानिक भी शामिल रहे।
भारत में तापमान वृद्धि की रफ्तार भले वैश्विक औसत के मुकाबले कम हो, लेकिन हीटवेव का खतरा बड़ा है। दुनिया के कई देशों में हीटवेव लोगों की परेशानी की वजह बनी हुई है। हर दशक में गर्म दिनों की संख्या 5-10 दिन तक बढ़ रही है। पश्चिम भारत में बहुत ज़्यादा बारिश और गर्म दिन व रातों में बढ़ोत्तरी देखी गई है। इस रिसर्च में हीटवेव के साथ सूखे के बढ़ते जोखिम पर भी जोर दिया गया है, जो चिंता का विषय है।
रिपोर्ट के अनुसार हीटवेव के असर से खेती, जल प्रणालियों और इंसानी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके अलावा दुनिया में जितनी तेज़ी से तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है, उससे भारत में ऐसी मिली-जुली चरम मौसमी घटनाओं की बारंबारता और तीव्रता बढऩे की आशंका है।
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Updated on:
22 Aug 2026 03:43 am
Published on:
22 Aug 2026 03:42 am
