विदेश मंत्रालय को 58.23 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जिसका खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। रेवेन्यू में नुकसान और सही से फाइनेंस मैनेजमेंट नहीं करने के लिए कैग ने विदेश मंत्रालय को फटकार लगाई है।
सरकारी पैसों का गलत तरीके से इस्तेमाल होने के कारण विदेश मंत्रालय को 58.23 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जिसके लिए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने विदेश मंत्रालय को फटकार लगाई है। कैग के अनुसार ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड योजना पर पैसों के गलत इस्तेमाल के कारण सरकारी खजाने के रेवेन्यू में 58.23 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है । इसके अलावा देश के शीर्ष ऑडिटर कैग ने पेरिस और वाशिंगटन में भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना में "अनियमितताओं" को भी चिन्हित किया। दो देशों की इन राजधानी वाले शहरों में संपत्तियों की महंगी खरीद के बावजूद इन परिसरों को लगभग एक दशक से विदेश मंत्रालय ने यूज नहीं किया है।
कैग को पता चला है कि पूरे यूरोप में 17 मिशन और पोस्ट व यूनाइटेड किंगडम में तीन ने OCI कार्ड फीस निर्धारित करने के लिए स्थानीय मुद्राओं और US डॉलर के बीच विनिमय दरों को सही ढंग से अर्जेस्ट नहीं किया है।
यूरोप में 16.26 और UK में 41.97 करोड़ का नुकसान
विदेश मंत्रालय को यूरोप में 17 मिशनों और चौकियों से 16.26 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसके साथ ही यूनाइटेड किंगडम में OCI कार्ड जारी करते समय निर्धारित पूरा पैसा नहीं लेने के कारण 41.97 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कैग ने यह अनिमित्तता फरवरी 2017 से मार्च 2020 के दौरान पाई है, जिसके कारण कुल मिलाकर विदेश मंत्रालय के रेवेन्यू में 58.23 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
विदेश मंत्रालय ने घाटे को बताया काल्पनिक
विदेश मंत्रालय ने इस घाटे को काल्पनिक बताया है, जिसको लेकर कैग ने ऐतराज जताते हुए कहा है कि फीस का सही से कलेक्शन नहीं करने के कारण ही 58.23 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
2 दशकों के बाद भी वाशिंगटन व पेरिस में विदेश मंत्रालय ने नहीं यूज की संपत्ति
विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन व पेरिस में संपत्ति खरीदे जाने के 2 दशकों के बाद भी यूज नहीं किया है। इसके साथ ही कैग ने रिपोर्ट में चीन और जमैका में भारत के मिशनों ने ऐसे पैसे खर्च किए हैं, जिन्हें अवाइड किया जा सकता था।
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