Medical Negligence : नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के नवीनतम शोध के अनुसार भारत में एक साल में मेडिकल लापरवाही के 52 लाख मामले सामने आए। इतना ही नहीं, एक साल में मेडिकल मुकदमेबाजी के मामलों में 400 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई है।
Medical Negligence : पूरे भारत में अस्पतालों, क्लीनिकों और देखभाल के अन्य केंद्रों में हर रोज मरीजों के साथ चिकित्सीय लापरवाही बरती जा रही है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के नवीनतम शोध के अनुसार भारत में एक साल में मेडिकल लापरवाही के 52 लाख मामले सामने आए। इतना ही नहीं, एक साल में मेडिकल मुकदमेबाजी के मामलों में 400 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल एथिक्स के एक अध्ययन से पता चलता है कि केवल 46 प्रतिशत हॉस्पिटल्स या देखभाल केंद्र ही नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि मेडिकल लापरवाही के कारण होने वालीं 80 प्रतिशत मौतें सर्जिकल गलतियों के कारण होती हैं, जबकि आपातकालीन सेवाओं में होने वालीं 70 प्रतिशत मौतें कुप्रबंधन के कारण होती हैं। गौरतलब है कि मेडिकल लापरवाही किसी भी मेडिकल प्रोफेशनल्स की लापरवाही को इंगित करता है - चाहे वह डॉक्टर हो, नर्स हो या दंत चिकित्सक, तकनीशियन या फिर कोई अस्पताल कर्मचारी हो। यह तब मानी जाती है जबकि समान रूप से प्रशिक्षित मेडिकल प्रोफेशनल्स की तुलना में स्वास्थ्य सेवा देने वाला प्रोफेशनल्स स्वीकृत मानक से भटक जाता है और जिसके कारण रोगी को नुकसान होता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के आंकड़ों के अनुसार मेडिकल लापरवाही की सबसे अधिक शिकायतें पंजाब में 24 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 17 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 16 प्रतिशत और तमिलनाडु में 11 प्रतिशत दर्ज की गई हैं। अध्ययन में यह पाया गया है कि सर्जिकल प्रक्रियाओं में जरूरी नहीं कि अक्षमता या अज्ञानता से मरीज की मौत हो। बल्कि कई बार स्वास्थ्य देखभाल करने वाली टीमों के भीतर कम्यूनिकेशन गैप या फिर समन्वय अंतराल से मौत हो जाती हैं।
अध्ययन के दौरान यह भी सामने आया है कि शिकायत करने के दौरान अधिकांश लोग मेडिकल और लीगल टर्मिनोलॉजी को समझने से जूझते हैं। इस कारण पीड़ित को मेडिकल प्रोफेशनल्स से बात करने और अपने अधिकार समझने में दिक्कत होती है। साथ ही अधिकांश पीड़ित शिकायत करने में सबसे बड़ी दिक्कत जरूरी उपचार के दस्तावेज और सबूत जुटाने में करते हैं, जो कि प्रायः अस्पताल और डॉक्टर के पास ही होते हैं। गौरतलब है कि मेडिकल लापरवाही की शिकायत राज्य की मेडिकल काउंसिल के सामने दो साल के अंदर ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से की जा सकती है।
मेडिकल लापरवाही के सबसे अधिक मामले भारत में दर्ज किए जाते हैं। भारत के बाद सबसे अधिक मामले अमरीका में सामने आते हैं। दुर्भाग्य यह है भारत में ये आंकड़े ट्रेक नहीं किए जाते। लेकिन भारत में शिकायतें अधिक आने का एक कारण यह भी है कि इसकी कोई लागत नहीं होती। भारत में शिकायत बढ़ने का एक कारण डॉक्टर्स में परस्पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी है, जिससे वे अपने साथी की आलोचना करने से पीछे नहीं रहते। लेकिन इसके कारण आम जन और डॉक्टर्स के बीच संबंध व्यापक रूप से बिगड़ते हैं। -डॉक्टर नरेंद्र रूंगटा, इंटेंसिव केयर एक्सपर्ट