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Critical Minerals Explained: Lithium और Nickel क्या हैं, इन पर भारत की निर्भरता क्यों है और नई सरकारी योजना क्या बदलेगी?

भारत सरकार ने 2,814 करोड़ रुपये की Critical Mineral Processing Scheme को मंजूरी दी है। जानिए इस योजना से लिथियम, निकेल और कोबाल्ट की प्रोसेसिंग, EV बैटरी निर्माण और भारत की आयात निर्भरता पर क्या असर पड़ेगा।
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Updated: 5 Nov 2026, 4:19 PM IST
Lithium Processing in India
सरकार ने खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए योजना को दी मंजूरी (Photo-AI)

इलेक्ट्रॉनिक वाहन, मोबाइल, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का भविष्य उन खनिजों पर निर्भर है, जिनकी जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इनमें लिथियम, निकेल और कोबाल्ट प्रमुख है। इन्हें महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) भी कहा जाता है। माना जा रहा है कि आज जिस भी देश के पास इन खनिजों के भंडार, खनन और प्रोसेसिंग की महत्वपूर्ण क्षमता है, वह आने वाले समय में तकनीक और ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकेगा। 

इसके लिए भारत ने भी पहल शुरू कर दी है। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक बैठक आयोजित हुई। इसमें महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई। इसका नाम ‘महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत सहायता योजना’ (Critical Mineral Processing Scheme) रखा गया, जो कि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल तक लागू रहेगी। इस योजना के तहत देश में लिथियम और निकेल के प्रसंस्करण के लिए चार संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। 

दरअसल, भारत के पास इन खनिजों की घरेलू उपलब्धता और प्रोसेसिंग क्षमता सीमित है। जिसके चलते उसे कई महत्वपूर्ण खनिजों और उनसे बने प्रोसेस्ड मटेरियल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है।

सरकार की इस योजना का मकसद महज खनिजों की खुदाई बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें भारत में प्रोसेस करके बैटरी और दूसरी आधुनिक तकनीकों में इस्तेमाल के लायक बनाना भी है। 

आइए जानते हैं कि महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) क्या हैं, लिथियम, निकेल और कोबाल्ट क्या भूमिका है और भारत की नई सरकारी योजना देश की इंडस्ट्री के लिए क्या बदल सकती है? 

Critical Minerals क्या होते हैं और ये इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

Critical Minerals ऐसे खनिज होते हैं जो किसी देश की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इन खनिजों को महत्वपूर्ण इसलिए कहते है क्योंकि इनके विकल्प आसानी से उपलब्ध नहीं होते है। इसके अलावा इनकी जरूरत कई महत्वपूर्ण उद्योगों में भी होती है। 

इनकी सप्लाई कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित हो सकती है। इनकी सप्लाई बाधित होने पर उद्योगों और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भारत सरकार ने जून 2023 में 30 Critical Minerals की पहचान की थी, इनमें ये प्रमुख है...

क्रम संख्याCritical Mineral का नामहिंदी नाम
1Lithiumलिथियम
2Nickelनिकेल
3Cobaltकोबाल्ट
4Graphiteग्रेफाइट
5Copperतांबा
6Rare Earth Elementsदुर्लभ मृदा तत्व
7Vanadiumवैनेडियम
8Titaniumटाइटेनियम
9Tungstenटंगस्टन
10Galliumगैलियम

Lithium क्या है और इसका इस्तेमाल कहां होता है?

लिथियम दुनिया की सबसे हल्की धातुओं में से एक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हाई-एनर्जी-डेंसिटी बैटरी बनाने में उपयोगी है। आज के समय में इसका सबसे महत्वपूर्ण इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-ion Battery) में होता है।

Nickel क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?

निकेल एक मजबूत, सिल्वर-व्हाइट धातु है। इसका इस्तेमाल लंबे समय से स्टील, मिश्रधातु (Alloys), इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी उद्योग में किया जाता रहा है। निम्न चीजों में इसका इस्तेमाल होता है…

Cobalt क्या है और बैटरी में इसका इस्तेमाल क्यों होता है?

कोबाल्ट एक धातु है। इसका इस्तेमाल कई तरह की बैटरियों और औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। लिथियम-आयन बैटरी में इसका प्रमुख इस्तेमाल कुछ खास कैथोड केमिस्ट्री में होता है। इसके अलावा एनएमसी और एनसीए जैसी बैटरी केमिस्ट्री में कोबाल्ट का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि सभी बैटरियों में कोबाल्ट का इस्तेमाल नहीं होता है। 

कोबाल्ट को लेकर एक चुनौती यह भी है कि इसकी खदानों और प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा महज कुछ चुनिंदा देशों में ही है। भारत के लिए घरेलू स्तर पर कोबाल्ट की उपलब्धता और निकेल प्रोसेसिंग के दौरान इससे होने वाली रिकवरी महत्वपूर्ण हो सकती है।

खदान से निकले कच्चे खनिज को बैटरी में इस्तेमाल होने लायक कैसे बनाया जाता है?

इस पूरी प्रक्रिया को खनिज प्रसंस्करण (Mineral Processing) कहलाती है। खदान से निकले लिथियम और निकेल को सीधे इस्तेमाल नहीं करते है, क्योंकि इनमें मिट्टी और चट्टान और दूसरी अशुद्धियां मिली होती है। इसे शुद्ध करके ही इस्तेमाल किया जाता है। 

Critical Minerals और Rare Earth Elements में क्या अंतर है?

भारत Lithium, Nickel और अन्य Critical Minerals के लिए दूसरे देशों पर क्यों निर्भर है?

नीति आयोग के मुताबिक, भारत लिथियम, निकेल और कोबाल्ट के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। दरअसल, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि देश में इन खनिजों के पर्याप्त आर्थिक रूप से उपयोगी भंडार, खनन क्षमता और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी विकसित नहीं हुए हैं।

महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत सहायता योजना 2026 क्या है?

4 नवंबर को केंद्र सरकार ने इस योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 2,814 करोड़ रुपये है। यह योजना अगले पांच साल तक रहेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में लिथियम और निकेल की प्रोसेसिंग के लिए घरेलू औद्योगिक क्षमता विकसित करना है। इसके तहत चार प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे। 

योजना के प्रमुख प्रावधान

प्रावधानसरकारी योजना
कुल बजट₹2,814 करोड़
अवधि5 साल
शुरुआतवित्त वर्ष 2026-27
समाप्तिवित्त वर्ष 2030-31
कुल प्लांट4
लिथियम प्लांट2
निकेल प्लांट2

सरकार किन कंपनियों को कितनी सहायता देगी?

इस योजना के तहत पात्र कंपनियों को 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। कंपनियों के चयन के लिए भी सरकार ने दो प्रक्रिया रखी है, जो कि निम्न है…

1. तकनीकी योग्यता: सबसे पहले आवेदन करने वाली संस्थाओं की तकनीकी क्षमता और योग्यता की जांच होगी।

2. वित्तीय बोली: तकनीकी रूप से उपयुक्त निवेशक वित्तीय बोली में भाग लेंगे। कम सरकारी सहायता समूह सहायता के रूप में दो निवेशकों के लिए प्रत्येक खनिज के लिए आवश्यक वस्तुएँ।

सरकारी सहायता तीन किस्तों में दी जाएगी। इस किस्त परियोजना के लिए निर्धारित माइलस्टोन पूरा करने से संबंधित आवश्यकताएँ।

Lithium Mining और Lithium Processing में क्या अंतर है?

आधारLithium Mining (लिथियम खनन)Lithium Processing (लिथियम प्रसंस्करण)
मतलबजमीन से लिथियम युक्त अयस्क निकालना।अयस्क से लिथियम निकालकर उसे शुद्ध करना।
कामखनन और अयस्क की खुदाई करना।रासायनिक प्रक्रिया और रिफाइनिंग करना।
जरूरी संसाधनखदान, मशीनरी और श्रमिक।तकनीक, केमिकल, प्रोसेसिंग प्लांट और विशेषज्ञ।
आउटपुटलिथियम युक्त कच्चा अयस्क।लिथियम कार्बोनेट या लिथियम हाइड्रॉक्साइड जैसे शुद्ध पदार्थ।
इस्तेमालआगे की प्रोसेसिंग के लिए।बैटरी मटेरियल और अन्य लिथियम उत्पाद बनाने के लिए।

भारत में घरेलू Mineral Processing से EV और Battery Manufacturing को क्या फायदा होगा?

देश में अगर लिथियम, निकेल और दूसरे महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग घरेलू स्तर पर होगी तो इसकी सीधा फायदा कई कंपनियों को मिलेगा। इससे इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी की सप्लाई चेन मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, घरेलू कंपनियों को निवेश का अवसर, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बैटरी निर्माण में वैल्यू एडिशन बढ़ेगा। इसके अलावा देश के ऊर्जा भंडारण क्षेत्र को भी फायदा होगा। 

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5 Nov 2026, 4:19 PM IST
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