
Delhi Air Pollution 2026: देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सर्दियों की दस्तक के साथ ही वायु प्रदूषण ने अपने कड़े तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पूरे क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 'खराब' श्रेणी में बना हुआ है। ऐतिहासिक स्थलों से लेकर प्रमुख अस्पतालों के आसपास धुंध की एक गहरी परत बिछी नजर आ रही है।
आंकड़ों पर नज़र डालें तो कालिंदी कुंज क्षेत्र 267 एक्यूआई के साथ सबसे अधिक प्रभावित दर्ज किया गया, जबकि एम्स (AIIMS) के पास 255 और इंडिया गेट के आसपास 236 एक्यूआई दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जिससे हवा में नमी और प्रदूषक तत्व जमीन के करीब जम रहे हैं।
दशहरा उत्सव के बाद पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खेतों में पराली जलाने की घटनाओं और पटाखों के धुएं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यद्यपि त्योहार और गिरती हवा के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन 100 दिनों में पहली बार एक्यूआई का 245 के पार जाना बेहद चिंताजनक है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) का पहला चरण (GRAP-1) लागू कर दिया है। इसके तहत सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग, निर्माण स्थलों पर धूल रोधी छिड़काव, तंदूरों में कोयले-लकड़ी पर पाबंदी और डीजल जनरेटरों के इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों को सुबह की सैर से बचने और एन-95 मास्क का उपयोग करने की सलाह दी है।
सीपीसीबी के मानकों के अनुसार 0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर श्रेणी मानी जाती है।
दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण हर साल बढ़ता है। पराली जलाने, वाहनों के धुएं, निर्माण कार्यों और मौसम की स्थिति से हवा और जहरीली हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक खराब हवा सांस की बीमारियों, आंखों में जलन और हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। पिछले वर्षों में दीवाली के आसपास प्रदूषण चरम पर पहुंच जाता था। इस बार प्रशासन ने पहले से सतर्कता बढ़ा दी है।