Medha Patkar Arrested: दिल्ली पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। मेधा पाटकर के खिलाफ कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
Medha Patkar Arrested: नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत ने उनकी गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद रिहा करने का आदेश दिया। यह गिरफ्तारी 24 साल पुराने एक मानहानि मामले में गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने प्रोबेशन बॉन्ड दाखिल नहीं किया था। यह मामला दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना द्वारा उनके खिलाफ दायर किया गया था।
साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विपिन खरब के समक्ष पेशी के दौरान, पाटकर के वकील ने कहा, मैं केवल निवेदन कर रही हूं कि मुझे रिहा कर दिया जाए, ताकि मैं प्रोबेशन बॉन्ड की शर्तों को पूरा कर सकूं। इस पर अदालत ने पूछा, क्या आपको कोर्ट के आदेश के अनुसार 3 मई तक का समय नहीं दिया गया था?
पाटकर के वकील ने कहा, गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है, मैं उससे इनकार नहीं कर रहा। प्रोबेशन का आदेश अभी भी प्रभावी है। मैं आज ही प्रोबेशन बॉन्ड दाखिल करूंगी। मुझे कोर्ट आते वक्त रास्ते से ही उठा लिया गया।
अदालत ने उन्हें प्रोबेशन बॉन्ड दाखिल करने की अनुमति दी और रिहा करने का आदेश दिया। पाटकर को दोपहर 12:30 बजे अदालत में पेश किया गया था। इस दौरान एल-जी वी.के. सक्सेना के वकील गजिंदर कुमार भी कोर्ट में मौजूद थे।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त रवि कुमार सिंह ने कहा, हमने गैर-जमानती वारंट को क्रियान्वित कर दिया है और मेधा पाटकर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की एक टीम सुबह उनके निवास पर पहुंची और उन्हें हिरासत में लिया।
आपको बता दें कि यह मामला 25 नवंबर 2000 को दिए गए एक प्रेस वक्तव्य से जुड़ा है, जिसमें पाटकर ने उस समय एनजीओ ‘नेशनल काउंसिल ऑफ सिविल लिबर्टीज’ के अध्यक्ष रहे सक्सेना को कायर कहा था और उन पर हवाला लेनदेन में शामिल होने का आरोप लगाया था। पाटकर ने यह भी आरोप लगाया था कि सक्सेना, जो उस समय गुजरात सरकार के सरदार सरोवर परियोजना का समर्थन कर रहे थे, गुपचुप तरीके से NBA का भी समर्थन कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा था कि सक्सेना ने NBA को एक चेक दिया था जो बाउंस हो गया था।