
दिल्ली पुलिस ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को प्रदर्शन के बाद शांति बनाए रखने की बात कही है। साथ ही पुलिस ने नेहा को शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड भी भरने का नोटिस भेजा है। जिसके खिलाफ AISA अध्यक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
नेहा बोरा ने अपनी याचिका के माध्यम से इस नोटिस को संविधान का उल्लंघन बताया है। नेहा की कानूनी टीम ने कोर्ट में इस नोटिस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
नोटिस में कहा गया है कि नेहा बोरा को एक जमानतदार के साथ 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड भरना होगा। इसका मकसद जांच के दौरान शांति बनाए रखना बताया गया है।
यह नोटिस 17 अक्टूबर का है और 18 अक्टूबर को नई दिल्ली जिला पुलिस ने जारी किया। इसमें नेहा बोरा को 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने को कहा गया था।
AISA का कहना है कि यह नोटिस अस्पष्ट है, तथ्यों से गलत है और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन करता है। ये अनुच्छेद अभिव्यक्ति की आजादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं।
बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट इस हफ्ते छुट्टियों पर है। फिर भी AISA की कानूनी टीम अधिवक्ता अभिक चिम्नी, प्रांजल अब्रोल और अन्य के नेतृत्व में चीफ जस्टिस के सामने अर्जेंट सुनवाई की मांग करने की तैयारी में है।
वकील मजिस्ट्रेट के सामने भी पेश होंगे और हाई कोर्ट में चुनौती की जानकारी देंगे। यह पूरा मामला 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़ा है।
नेहा बोरा उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं। दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रिवेंटिव हिरासत में लिया। अगली सुबह उन्हें छोड़ दिया गया। AISA का आरोप है कि उन्हें घंटों एक जगह से दूसरी जगह घुमाया गया और वकीलों से मिलने नहीं दिया गया।
नेहा बोरा ने हिरसत से रिहाई मिलने के बाद पुलिस की कार्रवाई को अवैध बताया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र और संविधान के लिए लड़ना अपराध नहीं हो सकता। इस पर पुलिस ने कहा कि कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था।