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कुत्ते सूंघकर पहचानेंगे कैंसर के लक्षण, एआइ करेगा पुष्टि, रिसर्च में 90 फीसदी नतीजे सटीक मिले

बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी 'डॉग्नोसिस' एक अनोखी तकनीक विकसित कर रही है, जिसमें प्रशिक्षित कुत्ते मरीज की सांस सूंघकर कैंसर के शुरुआती लक्षण पकड़ेंगे और AI इसकी पुष्टि करेगा। रिसर्च में 90% नतीजे सटीक मिले हैं।
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Sep 09, 2026
Cancer Breath Test
कुत्तों की सूंघने की क्षमता और AI की मदद से कैंसर का लगेगा शुरुआती पता, photo chatgpt

Dog Cancer Detection: कैंसर का प्रभावी इलाज इस बात पर निर्भर है कि बीमारी किस स्टेज में है। यदि शुरुआती चरण में इसका पता चल जाए तो ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। बेंगलूरु की स्टार्टअप कंपनी इसी दिशा में एक दिलचस्प तकनीक पर काम कर रही है। कंपनी कुत्तों की सूंघने की अद्भुत क्षमता का इस्तेमाल कर ऐसी जांच विकसित कर रही है, जिसमें मरीज की सांस सूंघकर कैंसर के शुरुआती संकेत पता चल जाएंगे।

कंपनी डॉग्नोसिस के मुताबिक कर्नाटक के छह अस्पतालों में 1,500 से ज्यादा लोगों पर 10 तरह के कैंसर पर रिसर्च किया और नतीजे 90 फीसदी तक सही मिले। हैरानी की बात ये है कि कुत्तों ने ऐसे कैंसर के संकेत भी पकड़ लिए, जिसके लिए उन्हें प्रशिक्षित नहीं किया गया था।

कैंसर विशेषज्ञों ने भी इसे शुरुआती और बेहद अच्छा संकेत बताया है। हालांकि अभी ये सिर्फ फेज 2 ट्रायल है। आगे के ट्रायल के बाद ही माना जाएगा कि ये रिसर्च सफल है या नहीं। यह रिसर्च जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (जेसीओ) में प्रकाशित हुई है।

मरीज के मास्क को सूंघकर लगाएगा पता

कैंसर होने पर शरीर में कुछ रासायनिक बदलाव होते हैं, जिनकी गंध इंसान महसूस नहीं कर सकता। कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से कहीं ज्यादा तेज होती है। प्रशिक्षित कुत्ते सांस के नमूने में इन बदलावों से जुड़ी गंध पकड़ सकते हैं। इसमें पहले मरीज अपनी सांस एक मास्क में छोड़ता है। इस मास्क को कुत्तों के सामने रखा जाएगा। कैंसर से जुड़ी गंध महसूस होने पर वह अलग प्रतिक्रिया देगा। इसे एआइ से डीकोड किया जाएगा।

भारत में इसकी बड़ी जरूरत

भारत में इस तकनीक की जरूरत इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि यहां कैंसर की नियमित जांच कराने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी के मुताबिक, 2024 में भारत में करीब 15 लाख नए कैंसर मामले सामने आए और नौ लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। 75 साल की उम्र से पहले हर 10वें भारतीय को कैंसर होने का खतरा है।

यह अंतिम जांच नहीं….

विशेषज्ञ इसे कैंसर की अंतिम जांच नहीं मानते। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों में कैंसर के संभावित खतरे को शुरुआत में पकडऩा है, ताकि जरूरत पडऩे पर उनकी सामान्य जांच कराई जा सके। सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना होगी कि प्रयोगशाला के बाहर भी कुत्तों की सूंघने की क्षमता उतनी ही सटीक कैसे रहेगी।

Updated on:
09 Sept 2026 01:28 am
Published on:
09 Sept 2026 01:28 am