सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता शुक्रवार सुबह 'गंभीर' हो गई। वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान के बारे में चेताते हुए एआईआईएमएस के पूर्व निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने कहाकि, वायु प्रदूषण को हम एक साइलेंट किलर कह सकते हैं।
उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हालत में है। दिल्ली और आस - पास के शहरों में शुक्रवार सुबह वातावरण में प्रदूषक तत्वों की एक मोटी परत फैल गई, जिससे प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक इस जहरीली हवा के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता शुक्रवार सुबह 'गंभीर' हो गई। वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान के बारे में चेताते हुए एआईआईएमएस के पूर्व निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने कहाकि, वायु प्रदूषण को हम एक साइलेंट किलर कह सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं पर बुरा असर - AIIMS पूर्व निदेशक
AIIMS दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने कहाकि, प्रदूषण से लोगों की मृत्यु हो रही हैं और जीवन स्तर कम हो रहा है। AIIMS में वायु प्रदूषण बढ़ते ही सांस की तकलीफ वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। गर्भवती महिलाओं और होने वाले बच्चों पर भी इसका बुरा असर होता है।
बच्चे-बुजुर्ग के फेफड़े और हार्ट कमजोर, बचें - डॉ.रणदीप गुलेरिया
AIIMS दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने आगे कहाकि,बच्चे, बुजुर्ग, जिनके के फेफड़े और हार्ट कमजोर हैं उनको ऐसी जगहों पर नहीं जाना चाहिए जहां प्रदूषण ज्यादा है। जाना है तो दिन में जाएं जब धूप निकल गई हो और मास्क लगा कर जाएं। वायु प्रदूषण को हम एक साइलेंट किलर कह सकते हैं।
वायु प्रदूषण से सांस सम्बंधी बीमारी - डॉ. हर्षल साल्वे
दिल्ली एम्स में सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. हर्षल साल्वे ने राजधानी की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, इस तरह की जहरीली हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी समस्याओं के अलावा गंभीर कई समस्याएं हो सकती हैं।
एन - 95 मास्क का प्रयोग करें, डाक्टर की सलाह
डॉ. साल्वे ने कहा, सीओपीडी और अन्य सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को बाहर जाते समय एन - 95 मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक सभी को बाहर जाने से बचना चाहिए। संवेदनशील मुद्दों से पीड़ित लोगों के लिए भी इनडोर गतिविधियों को निम्न स्तर पर रखना चाहिए।
एक्यूआई कब खतरनाक - सफर
सफर के आंकड़ों के अनुसार, पीएम 2.5 और पीएम 10 की सांद्रता क्रमश: 458 और 433 थी, दोनों एक ही गंभीर श्रेणी में थे। शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा' माना जाता है, 51 से 100 तक 'संतोषजनक' 101- 200 'मध्यम', 201-300 'खराब' 301-400 'बहुत खराब' और 401-500 'गंभीर'।
वायु प्रदूषण से बचाने के उपाय जानें
- घर के खिड़की-दरवाजों को बंद कर पर्दे लगा कर रखें।
- आउटडोर एक्टिविटी पूरी तरह से बंद कर दें।
- बच्चों को इनडोर गेम खिलाएं।
- एन-95 मास्क का प्रयोग करें पॉल्यूशन से बचाएंगा।
- कपड़े का मास्क न पहनें।
- अगर खांसी से बचना है तो गर्म पानी पीएं, स्टीम जरूर लें।
- भाप से लंग्स में कफ में चिपके नैनो कण बाहर आएंगे।
घरेलू उपाए जानें
- अदरक, तुलसी, जायफल, दालचीनी, तेजपत्ते और काली मिर्च का काढ़ा बना लें।
- खांसी से राहत पाने के लिए मुलैठी की डंठल चूसे।
- सरसों के तेल में लहसुन और अजवाइन की मालिश।
- छाती में जकड़न से परेशानी हो रही तो आप सरसों के तेल में लहसुन और अजवाइन