
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जीएसटी मामलों में धारा-69 के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों में स्पष्टता नहीं होने के प्रति चिंता प्रकट की और कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को अहमियत देते हुए जरूरत पड़ने पर वह कानून की व्याख्या करेगा लेकिन लोगों का उत्पीड़न नहीं होने देगा।
कोर्ट ने जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को दंड प्रक्रिया संहिता और संवैधानिक अधिकारों से बेमेल बताते हुए दायर करीब 281 याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को जीएसटी कानून के तहत पिछले तीन साल में जारी नोटिसाें की संख्या और एक से पांच करोड़ रुपए बकाया के मामलों में इस दौरान की गई गिरफ्तारियोंं की जानकारी पेश करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि जीएसटी विभाग के अधिकारी पुलिस नहीं होने के कारण गिरफ्तारी नहीं कर सकते जबकि पकड़े गए लोगों को वकील से भी बात करने से रोका जाता है। यह कृत्य सीआरपीसी के प्रावधानों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस मामले में अगली सुनवाई आठ मई को होगी।