हाल ही में एक सर्वे हुआ है, जिसके अनुसार AI का इस्तेमाल करने के मामले में भारत के Gen-Z दुनियाभर से आगे है। और क्या कहता है यह सर्वे? आइए नज़र डालते हैं।
भारत के युवा लोग तकनीकी क्रांति के मोर्चे पर वैश्विक स्तर पर सबसे आगे खड़r है। हाल ही में जारी 'डेलॉयट जेन-ज़ी और मिलेनियल सर्वे' के अनुसार भारत के जेन-ज़ी और मिलेनियल्स अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (Artificial Intelligence - AI) को अपनाने और उसका इस्तेमाल करने के मामले में कहीं ज़्यादा कुशल, तैयार और आत्मविश्वासी हैं। रिपोर्ट के हैरान करने वाले आंकड़ों के मुताबिक भारत में 91% मिलेनियल्स और 85% जेन-ज़ी पेशेवर अपने कार्यक्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करने में पूरी तरह आश्वस्त हैं, जो वैश्विक औसत से काफी आगे है।
वैश्विक आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो 74% जेन-ज़ी और 74% मिलेनियल्स एआई का इस्तेमाल करने में सहज हैं। यह भारत के आंकड़े से कम है।
यह सर्वे इस बात की पुष्टि करता है कि भारत के युवाओं में एआई का इस्तेमाल सिर्फ सामान्य कामकाज तक सीमित नहीं है। 90% से ज़्यादा युवाओं ने माना कि वो सीखने, विकास करने, करियर मार्गदर्शन लेने और काम के तनाव को प्रबंधित करने के लिए एआई टूल्स पर निर्भर हैं। करीब 93-95% उत्तरदाता कार्यस्थल पर नियमित रूप से एआई का इस्तेमाल करते हैं और उनका मानना है कि इसने उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। हालांकि इस तकनीकी उत्साह के बीच युवा कार्यबल वित्तीय तनाव और बेरोजगारी जैसी गंभीर चिंताओं से भी जूझ रहा है।
भारत में 35% मिलेनियल्स और 32% जेन-ज़ी पहले ही एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरे कर चुके हैं। वहीं 60% मिलेनियल्स और 54% जेन-ज़ी भविष्य में एआई अपस्किलिंग के इच्छुक हैं। मिलेनियल्स की तुलना में जेन-ज़ी को एआई टूल्स को अपने वर्कफ़्लो में शामिल करने में ज़्यादा कठिनाई हो रही है। जहाँ 35% जेन-ज़ी ने इस एकीकरण को चुनौतीपूर्ण माना, वहीं मिलेनियल्स में यह आंकड़ा केवल 25% रहा।
वित्तीय दबाव के कारण 54% जेन-ज़ी और 44% मिलेनियल्स ने अपने जीवन के बड़े फैसलों (जैसे घर खरीदना या शादी) को टाल दिया है। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा जेन-ज़ी के लिए 55% और मिलेनियल्स के लिए 44% है। 37% जेन-ज़ी को लगता है कि वो अपना घर नहीं खरीद सकते।
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