
AI
एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। कई सेक्टर्स में एआई अब अहम हिस्सा बन गया है। वैज्ञानिक भी अंतरिक्ष से जुडी खोजों में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। अक्सर ही हमारे मन में यह सवाल आता है कि क्या हमारी आकाशगंगा में सितारों से भी ज़्यादा ग्रह हैं? प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की नई खोज ने इस सवाल को पहले से कहीं ज्यादा मज़बूत कर दिया है। वैज्ञानिकों ने एआई की मदद से सौर मंडल के बाहर 10,000 से ज़्यादा नए संभावित ग्रहों की पहचान की है।
अब तक नासा (NASA) 6,286 एक्सोप्लैनेट्स यानी सौर मंडल के बाहरी ग्रहों की पुष्टि कर पाया था। लेकिन अब एक ही रिसर्च ने संभावित ग्रहों की संख्या को लगभग दोगुनी कर दिया है। अगर 8.3 करोड़ सितारों में 10,000 ग्रह मिले हैं, तो पूरी आकाशगंगा के अरबों सितारों के पास कई ज़्यादा पडोसी ग्रह होने की संभावना है।
वैज्ञानिकों ने नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (टीईएसएस) के पुराने डेटा का विश्लेषण किया। यह डेटा 8.3 करोड़ सितारों से जुड़ा था, जिसे इंसानों के लिए खंगालना लगभग असंभव माना जाता है। एआई मॉडल ने उन बहुत हल्के बदलावों को पहचाना, जो तब दिखाई देते हैं जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुज़रता है। इस दौरान तारे की रोशनी क्षणभर के लिए थोड़ी कम हो जाती है। यही डिप संभावित ग्रहों का संकेत बनता है। दिलचस्प बात यह रही कि नई रिसर्च ने उन धुंधले और ठंडे सितारों पर भी ध्यान दिया, जो सामान्य तारों की तुलना में 10,000 गुना कम चमकदार हैं। यह एआई की मदद से संभव हो पाया। ऐसे में एआई को अंतरिक्ष का नया जासूस कहना गलत नहीं होगा।
कुल 11,554 संभावित उम्मीदवारों में से 10,091 पूरी तरह नए ग्रह हैं। इनमें कम से कम 11 'सुपर-अर्थ' शामिल हैं यानी ऐसे चट्टानी ग्रह, जो पृथ्वी से एक से दो गुना बड़े हो सकते हैं। ज़्यादातर खोजे गए ग्रह गैस दिग्गज हैं, जिनकी संरचना बृहस्पति और शनि जैसी मानी जा रही है।
फिलहाल वैज्ञानिक यह पता लगाने में जुटे हैं कि इनमें से कौनसे ग्रह अपने तारों के 'गोल्डीलॉक्स ज़ोन' में स्थित हैं यानी ऐसी दूरी पर, जहाँ तापमान न बहुत गर्म हो और न बहुत ठंडा। यही वह क्षेत्र माना जाता है, जहाँ तरल पानी और संभावित जीवन की संभावना सबसे ज्यादा होती है। यदि इन 10,000 उम्मीदवारों में से आधों की भी पुष्टि हो जाती है, तो यह खोज ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी के अकेले होने की धारणा को हमेशा के लिए बदल सकती है।
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Updated on:
16 May 2026 07:13 am
Published on:
16 May 2026 07:13 am
