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दुनियाभर में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इन्हें चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली-पानी खर्च हो रहा है। ये प्रोजेक्ट अब दुनिया में बढ़ रहे ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन (Britain) में 100 से ज़्यादा नए डेटा सेंटर ऐसे हैं जो बिजली के लिए सीधे राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ने का इंतज़ार नहीं कर सकते, इसलिए वो विकल्प के तौर पर गैस से अपनी बिजली खुद बनाने की योजना बना रहे हैं।
पहले गैस का इस्तेमाल आमतौर पर सिर्फ अस्थायी समाधान के तौर पर होता था। हालांकि अब ऊर्जा संकट के चलते अब इसे विकल्प के रूप में आजमाया जा रहा है।
ब्रिटेन में गैस सप्लायर्स की संस्था फ्यूचर एनर्जी नेटवर्क्स की रिसर्च हेड सिल्विया साइमन के अनुसार पिछले दो सालों में डेटा सेंटर ऑपरेटरों ने गैस कनेक्शन के लिए 100 से ज़्यादा अनुरोध किए हैं। इनमें इतनी ऊर्जा खर्च होने वाली है कि लंदन को लगभग साढ़े चार महीने तक गैस आपूर्ति के ज़रिए चला सकते हैं।
नेशनल एनर्जी सिस्टम ऑपरेटर के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर डेटा सेंटर सीधे ग्रिड से न जुड़कर गैस पर चलते रहे तो इससे ब्रिटेन के क्लीन पावर 2030 लक्ष्य पर असर पड़ सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि बिजली उत्पादन में बिना नियंत्रित गैस का हिस्सा 5% से कम रखा जाए, लेकिन डेटा सेंटरों का गैस पर निर्भर होना इस संतुलन को बिगाड़ सकता है।
गैस पर बढ़ती निर्भरता नहीं है सही
डेटा सेंटरों की गैस पर बढ़ती निर्भरता सही नहीं है, क्योंकि इससे ब्रिटेन के के नेट-ज़ीरो लक्ष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इससे लाखों टन CO₂ उत्सर्जन बढ़ेगा। यह जीवाश्म ईंधन पर लॉक-इन पैदा करेगा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को रोकेगा। इससे वायु प्रदूषण बढ़ेगा, मीथेन रिसाव होगा, बिजली की कीमतें आम लोगों के लिए महंगी होंगी और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव पड़ेगा। अस्थिर वैश्विक गैस कीमतों से अर्थव्यवस्था जोखिम में पड़ेगी और जलवायु विश्वसनीयता को नुकसान होगा।
Published on:
19 May 2026 11:50 am
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