राष्ट्रीय

India-US trade deal: क्या ट्रंप टैरिफ से बदली भारत की व्यापार नीति? या फिर मोदी सरकार ने हार के जबड़े से ‘जीत’ की हासिल

India-US trade deal: क्या ट्रंप टैरिफ की वजह से भारत को अपने व्यापार नीति में बदलाव लाना पड़ा, या फिर भारत संग दुनिया भर के देशों ने FTA साइन करके ट्रंप के माथे पर शिकन ला दिया। पढ़ें पूरी खबर...

3 min read
Feb 03, 2026
Indian Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump (Photo - ANI)

India-US trade deal: अमेरिका ने भारत संग व्यापार समझौता होने का घोषण कर दी है। ट्रंप ने भारत पर लगाए गए रेसिप्रॉकल टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी पर लाने का ऐलान किया है। वहीं, व्हाइट हाउस की तरफ से भारत में रूसी तेल आमद कम होने की वजह से 25 फीसदी टैरिफ हटाने का ऐलान किया गया है।

भारत संग व्यापार घाटे में था अमेरिका

भारत संग व्यापार में अमेरिका घाटे में था। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक था। भारत ने बीते कुछ समय में अमेरिकी सामानों की आयात बढ़ाई है। इससे अमेरिका का व्यापार घाटा कुछ कम हुआ है। कॉमर्स इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक अमेरिका के साथ भारत का सामानों का व्यापार अधिशेष अप्रैल में $3.17 बिलियन से घटकर नवंबर में लगभग आधा होकर $1.73 बिलियन हो गया है।

टैरिफ लगने के बाद निर्यात में आई भारी कमी

अगस्त महीने में 50 फीसदी टैरिफ लगने के बाद भारत के निर्यात में कमी आई। भारत का निर्यात अगस्त में $6.86 बिलियन से घटकर अक्टूबर में $6.30 बिलियन हो गया, जबकि आयात अगस्त में $3.60 बिलियन से बढ़कर अक्टूबर में $4.84 बिलियन हो गया। सबसे अधिक गिरावट गारमेंट्स, जूते और खेल के सामानों में देखी गई। हालांकि, नवंबर में भारत ने इसका तोड़ निकालने की कोशिश की। इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर टैरिफ नहीं होने की वजह से उसका निर्यात अधिक किया गया। इससे अमेरिका को होने वाले निर्यात में 50 फीसदी के भारी भरकम टैरिफ होने के बावजूद 22 फीसदी का उछाल देखने को मिला।

अमेरिकी कच्चे तेल की आमद बढ़ी, रूसी तेल की घटी

अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने पर 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया था। 50 फीसदी टैरिफ के साथ भारत सबसे टैरिफ प्रभावित देश बन गया, क्योंकि व्यापार युद्धविराम के बाद चीन पर टैरिफ को ट्रंप ने कम कर दिया था। इसके बाद नवंबर के आखिरी में रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर वाशिंगटन के प्रतिबंधों की घोषणा की। साथ ही, इन कंपनियों से तेल खरीदने वाले कंपनियों पर बैन की बात कही। इससे रिलायंस व अन्य तेल विपनन कंपनियों ने रूसी तेल खरीदना कम कर दिया।

ट्रेड डेटा से पता चला है कि इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत के तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.43 प्रतिशत थी। इसके उलट, रूस की हिस्सेदारी 37.88 प्रतिशत से घटकर 32.18 प्रतिशत हो गई है।

भारत से बाहर जाने लगा था निवेश

अमेरिकी टैरिफ का असर विदेशी निवेश पर भी दिखने लगा था। टैरिफ के चलते भारतीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल पनपा और निवेश बाहर जाने लगा। भारत सरकार को भी औद्योगिक नीति पर फिर से विचार करना पड़ा। बीते कुछ महीनों में सरकार ने कई क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर वापस ले लिए। इसका MSMEs पर असर पड़ने लगा। यही नहीं, सरकार को गारमेंट्स उद्योग के वैल्यू चेन पर दवाब कम करने के लिए कपास पर 11 फीसदी ड्यूटी हटा दी।

भारत ने कई देशों के साथ किए FTA

अमेरिकी टैरिफ के बाद भारत ने कई देशों के साथ ट्रेड डील साइन किए। बीते 27 जनवरी को भारत और 27 यूरोपीय देशों के संघ यूरोपीय यूनियन (EU) के संग FTA किया। मोदी सरकार ने यूनाइटेड किंगडम के साथ फ्री ट्रेड डील साइन किया। ओमान के साथ भी FTA किया। न्यूजीलैंड, GCC और रूसी नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ ट्रेड डील पर बातचीत जारी है।

भारत ने हार के जबड़े से 'जीत' कैसे हासिल की?

आर्थिक मामलों के जानकारों ने टिप्पणी की कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने अमेरिका से व्यापार समझौते को लेकर शुरुआत से संयमित रुख अपनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर नई दिल्ली ने संयमित जवाब दिए। साथ ही, सरकार लगातार कूटनीतिक चाल चलती रही। भारत ने अमेरिकी ट्रेड डील में कछुए की रफ्तार चलकर टैरिफ में कमी करवाई। पीएम मोदी ने अमेरिका के कृषि और डेयरी सेक्टर खोलने की मांग को ठुकराया।

हालांकि, ट्रेड डील साइन होने के बाद अंतिम रूप से स्पष्ट हो पाएगा कि भारत ने कृषि या डेयरी सेक्टर में किसी तरह का समझौता किया है कि नहीं। उनका मानना है कि मोदी सरकार संभवत: उन कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने राजी हुई है जो प्रीमियम हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से मोदी सरकार कृषि और डेयरी सेक्टर को नहीं खोलेगी, क्योंकि यह राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मुद्दा है, जबकि अमेरिकी कृषि मंत्री ने दावा किया कि भारत से अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भी डील हुई है।

Updated on:
03 Feb 2026 11:11 am
Published on:
03 Feb 2026 09:53 am
Also Read
View All

अगली खबर