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‘उनके साथ कोई नहीं बचा…’, ममता बनर्जी के बिगड़ते हालातों पर दिलीप घोष ने कसा तंज

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल नगर निगम चुनावों की घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए चुनावों का स्वागत किया।
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Dilip Ghosh

दिलीप घोष (फोटो- एएनआई)

BJP Dilip Ghosh Slams on TMC: पश्चिम बंगाल में नगर निगम चुनावों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।भारतीय जनता पार्टी और TMC के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है। इसी बीच भाजपा नेता और राज्य के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां की हैं। नगर निगम चुनाव को लेकर बढ़ती चुनावी हलचल के बीच दिलीप घोष (Dilip Ghosh) का यह बयान राज्य की राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व पर दिलीप घोष का हमला

मीडिया से बातचीत के दौरान दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब उनके साथ कोई नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी अपनी पार्टी के लोग भी उन्हें पहले की तरह नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे हैं। दिलीप घोष ने कहा, अकेले चलने का क्या मतलब है? अब उनके साथ कोई नहीं बचा है। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सिर्फ राजनीतिक नाटक और दिखावे की राजनीति की है।

नगर निगम चुनाव कराने के फैसले का किया स्वागत

नगर निगम चुनावों की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हावड़ा समेत कई नगर निगमों में पिछले 7 से 9 सालों से चुनाव नहीं हुए थे, जिससे स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण आम लोगों को अपेक्षित नागरिक सुविधाएं प्रभावी तरीके से नहीं मिल सकीं। इस दौरान पूरा प्रशासनिक तंत्र अधिकारियों के भरोसे चलता रहा, जिससे जवाबदेही भी प्रभावित हुई।

चुनाव के बाद होगा सुधार

दिलीप घोष के अनुसार, स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों का होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि जब नगर निगमों का संचालन केवल प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में होता है, तब जनता की समस्याओं का समाधान अपेक्षित गति से नहीं हो पाता। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव संपन्न होने के बाद स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों की वापसी से नागरिक सेवाओं में सुधार देखने को मिलेगा।

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