ईरान-इजरायल के बीच 28 फरवरी से जारी युद्ध का असर दुनिया के कई देशों में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होने वाली ईंधन की सप्लाई पर पड़ा है। अब इस युद्ध का असर शादियों पर भी असर पड़ रहा है।
Iran–Israel War: ईरान और US-इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर दुनिया के कई देशों में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होने वाली क्रूड़ ऑयल और गैस की सप्लाई पर हुआ है। अब इसका असर भारत के लोगों के घर तक दिख रहा है। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से बिहार के सैकड़ों लोग खाड़ी देशों में फंसे हैं। विदेश में फंसे यह सभी लोग खाड़ी देशों में नौकरी पर गए हैं, लेकिन युद्ध की वजह से वे अपने घर नहीं पहुंच पा रहे हैं। विदेश में फंसे इन लोगों में बिहार के गयाजी जिले के खंडेल गांव निवासी मिन्हाज भी शामिल हैं।
ईरान और US-इजरायल युद्ध की वजह से बिहार के गयाजी जिले के खंडेल गांव निवासी मिन्हाज विदेश में फंसे हैं। मिन्हाज की शादी 30 मार्च होनी है, लेकिन वह कतर में फंसे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिन्हाज के पिता जलील शाह बेटे का इंतजार कर रहे हैं। जलील शाह ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे की शादी जहानाबाद के एरकी गांव में तय की है, यह शादी 30 मार्च को होनी है। जलील शाह ने बताया कि उनके बेटे मिन्हाज ने 26 मार्च को फ्लाइट का टिकट बुक कराया था, लेकिन युद्ध की वजह फ्लाइट 2 बार रद्द हो चुकी है।
ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से मिन्हाज कतर में फंसे हैं। मिन्हाज के पिता ने बताया कि शादी की तारीख तय है, कार्ड छप गए हैं, पारंपरिक पगड़ी तैयार है और गाड़ियां एवंं दावत की बुकिंग भी हो गई है। अब घर वालों को सिर्फ दुल्हे का बेसब्री से इंतजार है। दूल्हे के पिता जलील शाह ने बताया कि अब उन्हें सिर्फ कुछ चमत्कार होने का इंतजार है, ताकि उनका बेटा घर वापस आ सके। जलील शाह का परिवार किसी अनहोनी की आशंका के चलते बेहद चिंतित है। दूल्हे के पिता ने कहा कि हमने दूल्हन वालों से हाथ जोड़कर माफी मांगी है। दुल्हन वालों से कहा है कि अगर बेटा समय से वापस नहीं आया तो खाड़ी देशों में स्थिति सामान्य होने के बाद शादी की दूसरी तारीख तय कर लें।
मिन्हाज के पिता जलील शाह ने बताया कि खंडेल और उसके आसपास के गांव इमलीथान, जयपुर, रतनपुर एवं पांडौल के करीब 400 लोग खाड़ी देशों में फंसे हैं। इन गांव में लगभग हर दूसरे घर का एक सदस्य विदेश में नौकरी करता है। विदेश में नौकरी कर रहे लोग अक्सर ईद और बकरीद के त्योहारों के समय घर लौटते हैं। इस बार युद्ध की वजह से त्योहार पर भी लोग घर नहीं लौट पाए। खंडेल और उसके आसपास के कई गांव में इसी महीने में 40-50 लोगों की शादी होनी है। फिलहाल, विदेश में फंसे लोगों के परिजनों को उनका बसब्री से इंतजार है।