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Patrika Explainer: जापान PM सनाए तकाइची की पहली भारत यात्रा, क्या इंडो पैसिफिक रीजन में बन रहा नया गठबंधन

जापान की पीएम सनाए तकाइची भारत दौर पर आई हुई हैं। उनके दौरे को लेकर सामरिक जगत में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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Jul 02, 2026
Japan PM Sanae Takaichi
जापान पीएम सनाए तकाइची (फोटो- ANI)

Japan PM Sanae Takaichi: जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची तीन दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंची हैं। उन्होंने भारत आने को लेकर उत्साह जताया है। जापान की सराकर ने X पर पोस्ट किया कि आपके गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए हमारा दिल से धन्यवाद। हम भारत आने के लिए बहुत उत्साहित हैं! इससे पहले बुधवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने तकाची का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का स्वागत करना सम्मान की बात है।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनाए तकाची के भारत दौरे पर खुशी जताते हुए कहा कि वे भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और गहरा करेंगी। हम अपने संयुक्त प्रयासों से इंडो-पैसिफिक और उससे आगे शांति, स्थिरता और समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे। जापानी पीएम तकाची ने भारत दौरे को लेकर कहा था कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत के साथ सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

बदलते वैश्विक हालात

बीते दो सालों में वैश्विक हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमानी टैरिफ नीति, ईरान युद्ध के आर्थिक झटके और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता ने दोनों देशों को परेशान किया है। जापान और भारत दोनों ही पश्चिम एशिया पर तेल व गैस के लिए काफी निर्भर हैं। ईरान-अमेरिका जंग ने दोनों की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया। मुद्रा में भी गिरावट आई और महंगाई बढ़ी। इसी दौरान भारत ने क्वाड देशों की मेजबानी की। इसके कुछ ही दिन बाद अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर पुराना पैसिफिक कमांड कर दिया। जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में पहले जितना सक्रिय नहीं रहना चाहता। वहीं, बदलते वैश्विक हालात में भारत और जापान अमेरिका के बिना ही इंडो पैसिफिक इलाके में गठबंधन बनाने में जुट गए।

जापान की सुरक्षा नीति में बदलाव

जापान ने बीते कुछ सालों में अपनी सुरक्षा नीति में व्यापक स्तर पर बदलाव किए हैं। प्रधानमंत्री तकाइची के नेतृत्व में जापान ने हथियार निर्यात में बड़े बदलाव किए हैं। अब जापान न सिर्फ हथियार बेच सकता है, बल्कि सह उत्पादन और सह विकास भी कर सकता है। चीन, उत्तर कोरिया और रूस की चुनौतियों के साथ-साथ अमेरिका की अनिश्चित नीति ने जापान को मजबूर किया है। जापान और भारत रक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच में मोगामी क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट, प्रोपल्सन सिस्टम, ड्रोन, इंजन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।

मोदी-तकाइची समिट का फायदा उठाना चाहिए: सुजन चिनॉय

सुजन चिनॉय मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) के महानिदेशक हैं और जापान में भारत के राजदूत रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली को अब मोदी-ताकाइची समिट से मिले मौके का फायदा उठाकर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में मिलकर काम करने को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जोखिम कम करने की रणनीति के तौर पर अपने नए प्रोएक्टिव सिक्योरिटी ओरिएंटेशन को ध्यान में रखते हुए जापान के लिए यह सही है कि वह अपने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स में भारत जैसे देशों को शामिल करने के लिए डायवर्सिफिकेशन करे।

उन्होंने आगे कहा कि अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान दौर से कई नतीजे मिले। जैसे कि पांच सालों में 10 ट्रिलियन जापानी येन के प्राइवेट इन्वेस्टमेंट का टारगेट और दोनों देशों के बीच 500,000 लोगों के एक्सचेंज का एक्शन प्लान, जिसमें जापान में काम करने के लिए 50,000 हाई-स्किल्ड भारतीय लोगों को बुलाना शामिल है।

Updated on:
02 Jul 2026 11:35 am
Published on:
02 Jul 2026 11:35 am