
Supreme Court News: मोदी सरकार ने दिल्ली समेत कई राज्यों में नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज हुई एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर CJI की अध्यक्षता वाली पीठ से इन FIR को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की है। इसके लिए केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 142 का भी हवाला दिया है।
सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की और इसे बुधवार को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। CJI ने मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए मोदी सरकार ने कहा कि कई मामलों में छात्रों और उनके परिवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। जिन्हें असाधारण परिस्थितियों में निरस्त किया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया कि नीट का पेपर लीक होने के बाद छात्रों और उनके परिजनों में आक्रोश था। इसको लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनों के दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने हो गए और दोनों के बीच झड़प हो गई। इसके बाद दिल्ली समेत कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
सरकार का कहना है कि यदि छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द नहीं होगी तो उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए इन एफआईआर को रद्द करना चाहिए।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को विशेष और असाधारण शक्ति प्रदान करता है। इसके तहत अदालत लंबित मामले में पूर्ण न्याय (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री जारी कर सकती है।
इसी बीच दिल्ली में छात्र आंदोलन को 5 सितंबर को नई गति मिलने की संभावना है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को मार्च निकालने की योजना बनाई है, जबकि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने भी इस लामबंदी का समर्थन किया है।
यह मार्च छात्रों से जुड़े लंबित मामलों और पिछले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग के आरोपों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर होने वाले इस मार्च में उन छात्रों के परिवारों के भी शामिल होने की उम्मीद है, जिन्होंने NEET परीक्षा रद्द होने और बाद में दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
छात्र संगठनों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों के खिलाफ लंबित मामलों को उठाना और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जवाबदेही तय करने की मांग करना है।