आंकड़ों की मानें तो देश की आधी खेती-बाड़ी के लिए सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। वे पूरी तरह से जून से सितंबर के बीच रहने वाले मॉनसून के पानी पर निर्भर हैं।
मॉनसून ने भारत में तेजी से प्रवेश किया लेकिन अब इसकी रफ्तार सुस्त पड़ गई है। इस कारण देशवासियों को जून की गर्मी का कहर 9 दिन और झेलना पड़ेगा। 16 साल बाद समय से पहले आए मॉनसून के 11-12 जून से फिर से पूरी रफ्तार के साथ सक्रिय होने की उम्मीद है। मौसम विभाग के एक विज्ञानी ने यह जानकारी दी है।
4 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मॉनसून ही है। यह देश के 70 फीसद क्षेत्र को कवर करता है और फसलों की जीवन रेखा पानी को पहुंचाता है। साथ ही डैम और झीलों के पानी का स्रोत भी यही है। आंकड़ों की मानें तो देश की आधी खेती-बाड़ी के लिए सीधी सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। वे पूरी तरह से जून से सितंबर के बीच रहने वाले मॉनसून के पानी पर निर्भर हैं।
मौसम विभाग के पुणे स्थित केंद्र के विज्ञानी एसडी सनन ने कहा कि मॉनसून की रफ्तार बीते कुछ दिन में सुस्त पड़ी है और फिर 11-12 जून के दरम्यान इसमें तेजी आएगी। इसके बाद यह देशभर के बचे हुए हिस्से को कवर करेगा।
बता दें कि मॉनसून 24 मई को केरल के रास्ते देश में आया और फिर दक्षिण, उत्तर पश्चिम और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में पहुंच गया। लेकिन कुछ दिनों बाद इसकी रफ्तार घटने लगी। मौसम विभाग ने इसका पूरा चार्ट तैयार किया है कि कब से मॉनसून किन-किन इलाकों में डाउन होने लगा।
मौसम विभाग के मुताबिक 11 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में बदलाव आएगा और देश के उत्तरी इलाकों में बारिश का माहौल बनेगा। केरल में 1 जून से मॉनसून की बारिश होने की संभावना रहती है और यह जुलाई मध्य तक पूरे देश में फैल जाता है। इससे किसानों को धान समेत दूसरी फसलों को रोपने का समय मिल जाता है।
मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून के पहले आने से किसानों के चेहरे पर खुशी है। इसके पहले आने से उन्हें हैरानी भी हुई है। मुंबई के एक ट्रेडर ने कहा कि जब तक बारिश तेज नहीं होती तब तक किसानों ने सोयाबीन, कपास और गर्मी की दूसरी फसलों को बोने का फैसला किया है। वे मिट्टी के और पानी सोखने का इंतजार कर रहे हैं।