
नेपाल में आई भीषण आपदा ने न जाने कितने परिवारों को अंदर तक हिला दिया, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी भी हैं जो उम्मीद की मिसाल बन गईं। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर निवासी ज्ञान सिंह, जो नेपाल के एक पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत थे, आपदा में करीब दो दिन और एक रात तक मौत के साये में फंसे रहने के बाद आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए। उनके घर वापस पहुंचते ही पूरे परिवार ने राहत की सांस ली।
ज्ञान सिंह ने बताया कि 26 अगस्त की सुबह सब कुछ सामान्य था। वह रोज की तरह करीब सात बजे ड्यूटी पर पहुंचे थे। लेकिन सुबह साढ़े नौ बजे के आसपास पावर हाउस के अंदर अचानक हवा का तेज झोंका आया और फिर भयानक आवाज गूंजने लगी। पल भर में साथियों के कपड़ों और शरीर पर पानी-मिट्टी लगी नजर आई। समझते-समझते सभी ने असेंबली प्वाइंट की ओर दौड़ लगा दी। बाद में पता चला कि टनल के रास्ते अंदर पानी घुस आया था।
सबसे भारी दिल करने वाली बात यह रही कि करीब 110 लोग तो सुरक्षित बाहर निकल गए, लेकिन एक कर्मचारी मलबे में फंसा रह गया, जिसे तलाशना नामुमकिन जैसा हो गया। बाहर निकलने के बाद हालात और डरावने हो गए, बड़े-बड़े पत्थर और मलबा बहकर आ रहा था। कर्मचारी ऊंचाई पर जाकर घंटों डर के साये में बैठे रहे।
ज्ञान सिंह ने बेहद भावुक होकर कहा कि उस पल उन्हें और उनके साथियों को लगा था कि शायद बचना मुश्किल है। लेकिन सभी ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया और मुश्किल समय एक साथ काटा। अगली सुबह नेपाल सेना की टीम पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ, जिसके बाद उन्हें बुटवल और फिर काठमांडू सुरक्षित पहुंचाया गया।
हादसे के दिन सुबह परिवार से आखिरी बात हुई थी। इसके बाद घंटों संपर्क टूटा रहा, जिससे घर में कोहराम मच गया। अगले दिन जब मोबाइल सिग्नल मिला तो सबसे पहले बेटे को फोन कर बताया कि वे सुरक्षित हैं।
हिमाचल के चार कर्मचारियों में से तीन सुरक्षित लौट आए, लेकिन ऊना जिले के सुखविंदर अब भी लापता हैं। भतीजी रक्षा और भाभी पदमा देवी ने चाचा के लौटने पर राहत जताई, लेकिन साथी के सुरक्षित मिलने की दुआ अब भी जारी है।