
Uniform Civil Code: महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लिए सात सदस्यों वाली कमेटी बनाने की घोषणा के बाद बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने UCC का विरोध करने वालों पर हमला बोला है।
राणे ने कहा- हमारे संविधान में पहले से ही यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रावधान है। इसलिए, जो कोई भी डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का संविधान मानते हैं, उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
राणे ने आरोप लगाया कि UCC का विरोध वे लोग कर रहे हैं जो देश में भारतीय संविधान की जगह शरिया कानून लेकर आना चाहते हैं।
राणे ने यह भी कहा कि देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना चाहिए, चाहे वो किसी भी धर्म का हो। अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग नियम रखने से समाज में बराबरी नहीं आ सकती।
यूसीसी को लेकर राणे ने यह भी कहा- भारतीय जनता पार्टी और महायुति सरकार ने चुनावों के दौरान इसे लागू करने का वादा किया था और हमारे मुख्यमंत्री अब उस वादे को पूरा कर रहे हैं।
यूसीसी की बात करते समय कई नेता और विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि इससे महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा। तलाक, उत्तराधिकार और शादी जैसे मामलों में एक समान नियम से महिलाओं और बच्चों के अधिकार मजबूत होंगे।
नितेश राणे ने भी इसी लाइन पर बात रखी कि संविधान सबको बराबरी देता है, फिर अलग कानून क्यों? महाराष्ट्र में इस कमेटी के गठन को भाजपा की बड़ी पहल माना जा रहा है।
पहले उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो चुका है और अब महाराष्ट्र भी इस राह पर बढ़ रहा है। कई राज्यों में इसकी मांग लंबे समय से चल रही है।
उधर, महाराष्ट्र में यूसीसी पैनल को लेकर कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- महाराष्ट्र हमेशा से एक प्रगतिशील राज्य रहा है, जो ज्योतिराव फुले, शाहू महाराज और डॉ बीआर अंबेडकर के आदर्शों से बना है। उनसे भी पहले, छत्रपति शिवाजी महाराज ने एक धर्मनिरपेक्ष और समावेशी परंपरा की नींव रखी थी।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा- महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार और सद्भाव की एक अलग विरासत है। अगर राज्य में इस तरह का राजनीतिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जाती है, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। मेरा मानना है कि महाराष्ट्र के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे।