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महाराष्ट्र में UCC पर मंत्री नितेश राणे का बड़ा बयान, बोले- जो देश में शरिया कानून चाहते हैं वही कर रहे इसका विरोध

Nitesh Rane on Uniform Civil Code: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने समान UCC को लेकर कहा कि इसका प्रावधान संविधान में है और जो लोग देश में शरिया लॉ चाहते हैं, वही इसका विरोध कर रहे हैं।
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Jul 09, 2026
nitesh rane minister
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे (इमेज सोर्स: ANI)

Uniform Civil Code: महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लिए सात सदस्यों वाली कमेटी बनाने की घोषणा के बाद बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने UCC का विरोध करने वालों पर हमला बोला है।

राणे ने कहा- हमारे संविधान में पहले से ही यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रावधान है। इसलिए, जो कोई भी डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का संविधान मानते हैं, उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

देश में भारतीय संविधान की जगह शरिया कानून लेकर आना चाहते

राणे ने आरोप लगाया कि UCC का विरोध वे लोग कर रहे हैं जो देश में भारतीय संविधान की जगह शरिया कानून लेकर आना चाहते हैं।

राणे ने यह भी कहा कि देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना चाहिए, चाहे वो किसी भी धर्म का हो। अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग नियम रखने से समाज में बराबरी नहीं आ सकती।

यूसीसी को लेकर राणे ने यह भी कहा- भारतीय जनता पार्टी और महायुति सरकार ने चुनावों के दौरान इसे लागू करने का वादा किया था और हमारे मुख्यमंत्री अब उस वादे को पूरा कर रहे हैं।

यूसीसी से किन वर्गों को फायदा?

यूसीसी की बात करते समय कई नेता और विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि इससे महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा। तलाक, उत्तराधिकार और शादी जैसे मामलों में एक समान नियम से महिलाओं और बच्चों के अधिकार मजबूत होंगे।

नितेश राणे ने भी इसी लाइन पर बात रखी कि संविधान सबको बराबरी देता है, फिर अलग कानून क्यों? महाराष्ट्र में इस कमेटी के गठन को भाजपा की बड़ी पहल माना जा रहा है।

पहले उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो चुका है और अब महाराष्ट्र भी इस राह पर बढ़ रहा है। कई राज्यों में इसकी मांग लंबे समय से चल रही है।

कांग्रेस नेता ने क्या कहा?

उधर, महाराष्ट्र में यूसीसी पैनल को लेकर कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- महाराष्ट्र हमेशा से एक प्रगतिशील राज्य रहा है, जो ज्योतिराव फुले, शाहू महाराज और डॉ बीआर अंबेडकर के आदर्शों से बना है। उनसे भी पहले, छत्रपति शिवाजी महाराज ने एक धर्मनिरपेक्ष और समावेशी परंपरा की नींव रखी थी।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा- महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार और सद्भाव की एक अलग विरासत है। अगर राज्य में इस तरह का राजनीतिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जाती है, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। मेरा मानना ​​है कि महाराष्ट्र के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

Updated on:
09 Jul 2026 06:26 pm
Published on:
09 Jul 2026 05:42 pm