राष्ट्रीय

राज्यसभा में नीतीश: तीन धड़ों में बंटी जेडीयू, बीजेपी के सहारे हो जाएगी पार्टी?

नीतीश कुमार के बिहार से बाहर होने का मतलब क्या है? क्या यह उनके राजनीतिक जीवन की आखिरी सौदेबाजी है?

3 min read
Mar 05, 2026
अमित शाह का स्वागत करते नीतीश कुमार

नीतीश कुमार के हाथों में अब नहीं रहेगा बिहार। करीब 20 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद उन्होंने दिल्ली का रुख कर लिया है। अब वह राज्यसभा सांसद बनने जा रहे हैं। उन्हें यह समझौता जिस भी परिस्थिति में करना पड़ा हो, पर हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि इसके मायने क्या हो सकते हैं?

उत्तराधिकार का सवाल: नीतीश के बाद कौन?

यह सवाल तो नया नहीं है, लेकिन पिछले साल विधान सभा चुनाव परिणाम आने के बाद यह ठंडा पड़ गया था। अब अचानक नीतीश के राज्यसभा जाने का प्रस्ताव मान लेने के बाद यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है और इसका जवाब भी जल्दी से ढूंढना पड़ेगा।

2005 के बाद से चुनावों में जेडीयू को सीटें चाहे जितनी आएं, मुख्यमंत्री नीतीश ही बनते रहे। यह इस बात का सबूत है कि उन्होंने हर वर्ग के मतदाताओं में अपनी पैठ बनाई और जदयू के लिए एक जनाधार विकसित किया। उस जनाधार को बनाए रखने और बढ़ाने वाला उत्तराधिकारी खोजना नीतीश और जदयू के लिए अब ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा।

चुनाव वर्षJD(U) की सीटेंBJP की सीटेंRJD की सीटेंस्थिति (Status)
2005 (अक्टूबर)885554नीतीश CM बने (NDA गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते)
20101159122नीतीश CM बने (JD-U की अब तक की सबसे बड़ी जीत)
2015715380नीतीश CM बने (RJD बड़ी पार्टी थी, फिर भी नीतीश चेहरा थे)
2020437475नीतीश CM बने (तीसरे नंबर की पार्टी होने के बावजूद)
2025858925नीतीश CM बने (BJP से कम सीटें आने के बावजूद)

अब जब सीएम बीजेपी का होगा तो जदयू ने जो अपना जनाधार बनाया है, उसके लिए बीजेपी और आरजेडी में सीधी लड़ाई होगी। ऐसी स्थिति में जदयू के राजनीतिक अस्तित्व के लिए चुनौती बढ़ेगी।

बीजेपी दे रही नीतीश को 'सम्मानजनक विदाई'?

उम्र और सेहत को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना है कि 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश के लिए आखिरी चुनाव था। वैसे उन्होंने 2020 में अपनी आखिरी चुनाव प्रचार सभा में संकेत दिया था कि वह उनका आखिरी चुनाव हो सकता है, लेकिन यह बयान वोट लेने के लिए दिया गया भावुक बयान साबित हुआ। लेकिन, अगले चुनाव में सच में उन्हें मौका मिलने के आसार नहीं थे। यह बात सच है कि उनके पास अभी पांच साल थे, लेकिन जिस तरह भाजपा ताकतवर होती गई वैसे में अब वह इंतजार करने के मूड में नहीं थी। ऐसे में बीच का रास्ता निकाला गया।

Bihar Politics: क्या काफी पहले लिखी जा चुकी थी बिहार की नई सियासी स्क्रिप्ट? (फोटो सोर्स: आईएएनएस)

मिलेगी हरिवंश की कुर्सी?

नीतीश के लिए भाजपा ने जो रास्ता निकाला है, राज्यसभा उसकी आखिरी मंजिल है या महज एक पड़ाव, यह देखने वाली बात होगी। जदयू कोटे से नीतीश और रामनाथ ठाकुर के राज्यसभा जाने से यह तय हो गया कि हरिवंश को तीसरा कार्यकाल नहीं मिलने जा रहा। तो क्या, नीतीश को हरिवंश की उपसभापति वाली कुर्सी भी मिलेगी? मिल भी सकती है। पर, यहां नीतीश की सेहत का पेंच फंस सकता है। हाल के दिनों में सार्वजनिक मंचों पर नीतीश की ऐसी हरकतें सामने आई हैं, जिन्हें देखने के बाद यह शक पैदा होता है कि क्या वह सदन का संचालन जैसी ज़िम्मेदारी निभा पाने लायक स्थिति में हैं?

बेटे निशांत का राजनीतिक लॉंचपैड तैयार?

सीएम की कुर्सी से नीतीश कुमार की विदाई के जरिये क्या उनके बेटे निशांत की राजनीतिक एंट्री की जमीन तैयार की गई है? पहले तो चर्चा निशांत के ही राज्यसभा जाने की थी, लेकिन अब चर्चा है कि उन्हें बिहार सरकार में ज़िम्मेदारी दी जाएगी। अब तक राजनीति से दूर रहे निशांत को अगर जदयू से राज्यसभा भेजा जाता तो नीतीश कुमार पर परिवारवाद का सीधा आरोप लगता। राज्य सरकार में ज़िम्मेदारी देने पर शायद इससे बचने की दलील गढ़ना अपेक्षाकृत आसान हो।

सीएम नीतीश: आए तो जमे ही रहे

कितनी बार सीएम बने नीतीश कब लीशपथकितने दिन रहे (लगभग)गठबंधन/मुख्य सहयोगी
13 मार्च 20007 दिन (बहुमत न होने के कारण इस्तीफा)NDA (समता पार्टी + BJP)
224 नवंबर 20054 साल, 181 दिनNDA (JD-U + BJP)
326 नवंबर 20103 साल, 175 दिन (जीतराम मांझी को कमान सौंपी)NDA (JD-U + BJP)
422 फरवरी 2015271 दिनJD-U (स्वतंत्र/बाहरी समर्थन)
520 नवंबर 20151 साल, 248 दिनमहागठबंधन (RJD + Congress)
627 जुलाई 20173 साल, 112 दिनNDA (JD-U + BJP)
716 नवंबर 20201 साल, 266 दिनNDA (JD-U + BJP)
810 अगस्त 20221 साल, 171 दिनमहागठबंधन (RJD + Congress)
9+1028 जनवरी 2024 और फिर 20 नवंबर, 2025 2 साल, 36 दिन (5 मार्च 2026 तक)NDA (JD-U + BJP)

निशांत को अगर बिहार सरकार में बड़ी ज़िम्मेदारी मिलती है और जेडीयू में बड़ा रुतबा मिलता है तो उनके लिए भी चुनौती होगी और खुद को साबित करके दिखाना होगा। वह राजनीतिक रूप से अनुभवहीन और अंतर्मुखी व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे में वह अपनी स्वीकार्यता कैसे बनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

जेडीयू टूटेगी?

नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले पर जदयू तीन धड़ों में बंटा हुआ है। एक धड़ा खुल कर इसके विरोध में है, दूसरा नीतीश के फैसले के समर्थन में है और तीसरा चुपचाप रह कर स्थिति को भांपने के मूड में है। जदयू पर नीतीश की पकड़ कमजोर पड़ी तो पार्टी में टूट के डर को नकारा नहीं जा सकता।

Also Read
View All

अगली खबर