
Sonam Wangchuk Medanta Hospital: हरियाणा पुलिस ने विपक्षी सांसदों के एक दल को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल जाने से रोक दिया। ये सांसद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मिलने आए थे, जो पिछले 25 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। इस कदम का विरोध करते हुए आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी के सांसद अस्पताल के बाहर ही डटे रहे। अस्पताल के मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच, विपक्षी नेताओं और प्रशासन के बीच तीखी बहस और हंगामा हुआ।
आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई को सरासर तानाशाही बताया और केंद्र सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का सीधा आरोप लगाया। अस्पताल के मुख्य गेट पर मीडिया से बात करते हुए संजय सिंह ने कहा, "इतिहास में पहली बार हम देख रहे हैं कि चुने हुए प्रतिनिधियों को अस्पताल में भर्ती किसी मरीज या भूख हड़ताल पर बैठे व्यक्ति से मिलने से रोका जा रहा है।
संजय सिंह ने कहा, "हम यहां 55 से ज़्यादा सांसदों के हस्ताक्षर वाली एक अपील लेकर आए थे, जिसमें सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया गया था। सोनम जी ने खुद कहा था कि अगर देश के सांसद उन्हें भरोसा दिलाएं, तो वे शायद हड़ताल खत्म कर दें। फिर भी, प्रशासन हमें उनसे मिलने नहीं दे रहा है। कल रात, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ उनसे मिले। उनके लिए कोई मेडिकल प्रोटोकॉल लागू नहीं किया गया। जब विपक्षी सांसद उनसे मिलने पहुंचे, तो नियमों और कानूनों का हवाला देकर उन्हें रोक दिया गया। क्या सरकार चाहती है कि सोनम वांगचुक की जान चली जाए?"
पुलिस द्वारा रोके जाने के विरोध में आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सांसदों ने अस्पताल परिसर के बाहर धरना दिया। RJD सांसद संजय यादव ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को सोनम वांगचुक से मिलने की इजाजत दी जा रही थी, जबकि विपक्षी सांसदों को रोका जा रहा था। उन्होंने पुलिस से पूछा कि क्या यह पाबंदी प्रशासन के निर्देशों पर लगाई गई थी या किसी और आदेश के तहत।
समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि जब तक उन्हें सोनम वांगचुक से मिलने की इजाजत नहीं मिल जाती, वे वहीं रहेंगी, चाहे रात हो जाए या सुबह हो जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब मेडिकल प्रोटोकॉल का हवाला क्यों दिया जा रहा है, जबकि पहले दूसरे नेताओं को उनसे मिलने की इजाजत दी गई थी।
सोनम वांगचुक की पत्नी, डॉ. गीतांजलि अंगमो, विपक्ष के नेताओं से मिलने के लिए मेदांता अस्पताल से बाहर आईं और भारी पुलिस निगरानी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सोनम वांगचुक पुलिस कस्टडी में नहीं हैं और उन्हें तनाव-मुक्त माहौल में बेहतर इलाज के लिए मेदांता लाया गया था। फिर भी, जो व्यक्ति 25 दिनों से उपवास कर रहा है, उसे लगातार मानसिक तनाव दिया जा रहा है।
डॉ. गीतांजलि अंगमो ने आगे कहा कि देश भर से 55 सांसद उनसे अपनी सेहत के लिए उपवास खत्म करने का आग्रह करने आए हैं, लेकिन सरकार उन्हें उनसे मिलने से रोक रही है। सोनम-जी का रुख़ साफ़ है: वह तभी अपना उपवास खत्म करेंगे जब उन्हें छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई और मुक़दमे वापस लेने के बारे में लिखित आश्वासन मिलेगा और सांसद उनसे ऐसा करने का आग्रह करेंगे।